डूंगरपुर. राजनीतिक दलों के लिए वोट बैंक का जरिया बने वागड़ प्रयाग बेणेश्वर धाम के विकास को लेकर एक बार फिर से उम्मीद जगी हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में पेश लेखानुदान बजट में घोषणा की हैं। जिसके तहत प्रदेश की गौरवशाली विरासतों को संरक्षित करने तथा लोक कलाओं से जुड़े कलाकारों को संबल प्रदान करने की दिशा में काम होगा। इसमें त्रिवेणी संगम बेणेश्वर धाम एवं मानगढ़ धाम बांसवाड़ा सहित प्रदेश के 20 मंदिरों व आस्था केंद्रों का विकास आगामी वर्ष में 300 करोड़ की राशि से कराया जाएगा। खास बात यह भी है कि पूर्व में भी सरकारों के स्तर से समय-समय पर बेणेश्वर के विकास की घोषणाएं की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक इसका पूर्ण विकास नहीं हो पाया हैं।
आगामी दिनों में शुरू होगा मेला
बेणेश्वर धाम जन-जन की आस्था का केन्द्र है। यहां पौष पूर्णिमा की महापदयात्रा से ही मेले का माहौल शुरू हो जाता है। आगामी दिनों में यहां मेला भरने वाला हैं। यह मेले में प्रदेश सहित अन्य राज्यों के श्रद्धालु भी पहुंचते हैं, लेकिन पर्यटन विभाग और प्रशासनिक स्तर पर मेले को राष्ट्रीय स्वरूप देने की दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए हैं। इसके लिए भी उचित पहल की दरकार हैं।
एक सच यह भी
धाम पर 132 करोड़ के हाई लेवल ब्रिज के निर्माण की चाल धीमी है। वहीं 100 करोड़ के मास्टर प्लान तैयार होने के बावजूद अब तक कोई पहल नहीं हुई हैं। इसी बीच सरकार ने बजट में 300 करोड़ की घोषणा में बेणेश्वर को भी शामिल कर दिया हैे, ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि पूर्व की कांग्रेस सरकार में की गई कवायद का क्या होगा। गौरतलब है कि इससे पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी बेणेश्वर के विकास को लेकर कार्ययोजना बनी थी, लेकिन वो भी मूर्त रूप नहीं ले पाई। सरकार बदलने के साथ ही बेणेश्वर धाम के विकास से जुड़ी घोषणाएं ठण्डे बस्ते में चली जाती हैं।
इनका कहना है
योजनाबद्ध ढंग से बेणेश्वर धाम के विकास की जरूरत है। पूर्व के वर्ष में 100 करोड़ का बेहतर मास्टर प्लान भी बनाया जा चुका हैं, इस घोषणा में उस प्लान को शामिल कर क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। लाखों श्रद्धालु धाम से जुड़े हुए है। ऐसे में विकास जल्द से जल्द गति पकड़े। – महंत अच्युतानंद महाराज