
फिरोजाबाद। संगीत की दुनियां अपने आप में अनोखी हैै। कोई थकान उतारने के लिए संगीत सुनता है तो कोई जीवन का आनंद प्राप्त करने के लिए संगीत का आनंद लेता है।
21 जून को होता है संगीत दिवस
21 जून यानि योग दिवस तो सभी जानते हैं। शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो जानता होगा कि आज का दिन विश्व संगीत दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। संगीत का जीवन में अपना अलग ही महत्व है। थकान दूर करने और मन को प्रसन्नचित करने में भी संगीत का अपना महत्व है। वीणा वादिनी संगीत महाविद्यालय के डायरेक्टर योगेश श्रीवास्तव ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी से राग निकलते थे।
श्रीकृष्ण भगवान गोपियों को सुनाते थे राग
वह राग गाकर गोपियों को रिझाने का काम करते थे। बालकिशन शर्मा ने बताया कि ठाट से राग होता है। एक ठाट से 450 राग निकलते हैं। ठाट भैरव राग सुबह पांच से सात बजे तक गाया जाता है। भैरव राग की पहचान रेधा कोमल हैं। पुराने समय में राग हुआ करते थे। उन्हीं से आज गाने और संगीत में बदलाव आया है। मंजीत सिंह का कहना है कि आज संगीत की दुनियां में रोजगार के तमाम अवसर हैं। संगीत ने लोगों को रातों रात एक नई पहचान देने का काम किया है। युवाओं में संगीत के प्रति लगाव बढ़ रहा है।