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ये गोरखपुर शहर है, मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप पर होती है सफाई
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ये गोरखपुर शहर है, मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप पर होती है सफाई

स्मार्ट सिटी बनने का सपना देख रहे गोरखपुर में सफाई का हाल बेहाल, मुख्यमंत्री के रहने पर भी नहीं होती सफाई

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गोरखपुर। नगर निगम में प्रशासनिक निगहबानी की कमी से लोगों को परेशान होना पड़ रहा। स्मार्ट सिटी बनने की होड़ में शामिल होने के बेताब शहर में लोगों को गंदगी से जूझना पड़ रहा। मंगलवार को सीनियर एडवोकेट प्यारेमोहन सरकार के आवास पर जा रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर से अलीनगर तक रास्ते में जगह-जगह पड़े कूड़े की ढेर पर नाराजगी जताई तो निगम प्रशासन हरकत में आया। आनन-फानन में निगम के जिम्मेदारों ने एक सुपरवाइजर व चार सफाईकर्मियों को निलंबित कर दिया। जबकि एक दूसरे सुपरवाइजर को नोटिस दिया है। पर मौजूं सवाल यह कि क्या निगम प्रशासन के पास लंबी-चैड़ी फौज को यह देखने के लिए समय नहीं है कि बिना मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के शहर में साफ-सफाई सुनिश्चित की जा सके।
दो दिनों के लिए गोरखपुर प्रवास पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मंगलवार को वापस लौटना था। लेकिन सुबह-सवेरे मंदिर के खास रहे सीनियर मोस्ट एडवोकेट प्यारे मोहन सरकार के निधन की सूचना मिल गई। सूचना पाकर मुख्यमंत्री ने लखनउ लौटने के पहले शोकसंतप्त परिवार के घर जाने को तैयार हो गए। श्रद्धासुमन अर्पित करने जा रहे मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की खबर जब नगर निगम के जिम्मेदारों को हुई तो उनके हाथ पांव फूल गए। क्योंकि गोरखनाथ मंदिर से अलीनगर के रास्ते में काफी गंदगी थी। जटाशंकर पोखरे से लेकर अधिवक्ता के आवास तक दस बजे तक सफाई तक नहीं हो सकी थी। आनन फानन में सफाई कर्मचारी लगाया गया। कई गाड़ियों को कूड़ा उठाने के लिए लगाया गया। साफ-सफाई होने लगी। लेकिन तबतक मुख्यमंत्री उधर आ गए। सफाई नहीं होने से नाराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदारों से पूछ लिया।
इसके बाद नगर निगम के जिम्मेदारों ने कार्रवाइयां कर अपना गला बचाने की कवायद शुरू कर दी।

 

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