गोरखपुर. कल तक जो डॉक्टर कफिल बच्चों के लिए मसीहा थे वह रविवार को अचानक सरकार की नजरों में खलनायक हो गए। प्रदेश सरकार ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सहायक आचार्य व इंसेफेलाइटिस वार्ड के प्रभारी डॉ. कफिल खान को बर्खास्त कर दिया है। डॉ. कफिल की बर्खास्तगी कई सवाल उल्टे सरकारी की कार्रवाई पर ही खड़े कर रहे। आखिर सरकार इस बर्खास्तगी के पीछे इतनी तेजी क्यों दिखा रही जबकि सरकार के मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक जांच रिपोर्ट आने की बात कह रहे थे। उधर इस कार्रवाई के बाद डायरेक्टर जनरल ऑफ मेडिकल एजुकेशन ने मीडिया से कहा कि डॉ. कफील ने सीएम के सामने स्वीकार किया कि वह अपने नर्सिंग होम से गैस सिलिण्डर आए थे।

डॉ. कफील वही डॉक्टर हैं जिन्होंने आक्सीजन की सप्लाई बाधित होने के बाद काफी सक्रियता दिखाई थी। उन्होंनेए डॉ. महिमा मित्तल आदि डॉक्टरों ने मिलकर अपने स्तर से आक्सीजन सिलेंडरों के इंतजामात कराए थे। आलम यह कि जब प्राइवेट सप्लायर ने बिना पैसा लिए आक्सीजन देने से मना किया था तो उन्होंने अपनी डेबिट कार्ड एक सहयोगी जूनियर डॉक्टर को दे पेमेंट कराया था। शनिवार को बातचीत में यह बात डॉक्टर कफिल ने स्वीकारी भी थी लेकिन उनके चेहरे पर किसी अनहोनी का डर साफ झलक रहा था। वह बार-बार यह दोहरा रहे थे कि वह पहले भारतीय हैं बाद में उनका मजहब है। उस वक्त जो भी उन्होंने किया वह बच्चों की खातिर किया। उन्होंने यह भी साफ तौर पर कहा कि केवल वह अकेले यह नहीं किए बल्कि उनके साथ डॉ. महिमा मित्तल और अन्य भी लगे रहे। खुद महिमा मित्तल के पति डॉक्टर हैं लेकिन वह इस समय बीमार हैं बावजूद वह लगी रहीं। डॉ. कफील ने यह भी कहा कि जो पेमेंट उन्होंने किया वह बाद में भुगतान हो जाएगा।
आज की कार्रवाई एक दिन पहले डॉ. कफील की बातचीत में चेहरे पर दिखे डर की झलक को साफ करती है। सूत्रों की मानें तो सरकार बच्चों की मौत पर खुद को घिरा होने की वजह डॉ. कफील को मानने लगी है। सरकारी तंत्र यह मान रहा कि आक्सीजन खत्म होने से मौत की बात कहीं न कहीं डॉक्टर के द्वारा ही बाहर आई। हालांकि उनके खिलाफ कार्रवाई को प्राइवेट प्रैक्टिस पर हुई कार्रवाई को आधार बनाया जा रहा है।
इस मामले में डायरेक्टर जनरल ऑफ मेडिकल एजुकेशन ने मीडिया से कहा कि डॉ. कफील खान उस युनिट के नोडल ऑफिसर हैं। सीएम के दौरे के दौरान खुद डॉ. खान ने यह एक्सेप्ट किया कि वह अपने नर्सिंग होम से सिलिण्डर लाए थे। तो ये बात बहुत आपत्तिजनक है। इसके बाद मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इन्हें नोडल ऑफिसर के पद से बदल दीजिये। उनकी जगह अब काम डॉ. भूपेंद्र शर्मा को नोडल ऑफिसर देख रहे हैं। डॉ. पीके सिंह को प्रिंसिपल का चार्ज दिया गया है। उन्होंने डॉ. कफील के नर्सिंग होम को लेकर मीडिया से कहा कि आप लोग कोई प्रूफ लाइये या इलाज करने का सबूत या स्वामित्व का प्रूफ लाइये तो मामला पुख्ता होगा।