2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ग्वालियर

प्रभु भक्त के समर्पण और त्याग का सम्मान करते हैं: संत रामचन्द्र दास

ग्वालियर. सिद्धपीठ श्री गंगा दास जी की शाला पक्ष शरद ऋतु के अवसर पर सिद्धपीठ श्री गंगा दास जी की शाला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में संत श्री रामचन्द्र दास महाराज ने कहा कि “प्रभु सदैव अपने भक्तों के वश में रहते हैं, इसलिए उन्हें दीनबंधु कहा गया है।” उन्होंने कथा के दौरान कृष्ण–सुदामा […]

Google source verification

ग्वालियर. सिद्धपीठ श्री गंगा दास जी की शाला पक्ष शरद ऋतु के अवसर पर सिद्धपीठ श्री गंगा दास जी की शाला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में संत श्री रामचन्द्र दास महाराज ने कहा कि “प्रभु सदैव अपने भक्तों के वश में रहते हैं, इसलिए उन्हें दीनबंधु कहा गया है।” उन्होंने कथा के दौरान कृष्ण–सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि भगवान ने सुदामा के समर्पण, त्याग और संतोष का सम्मान किया।

संत रामचन्द्र दास ने कहा कि आज मनुष्य के पास सब कुछ होते हुए भी संतोष नहीं है, इसलिए वह शांति का अनुभव नहीं कर पाता; जबकि सुदामा के पास न भोजन, न वस्त्र, न छत थी, फिर भी वे परम संतुष्ट थे। कथा से सीख मिलती है कि जहां संतोष है, वहीं प्रभु की कृपा है।

कथा के दौरान सुंदर भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। कार्यक्रम में कृष्ण–सुदामा की मनमोहक झांकी का दर्शन कराया गया। शुकदेव जी का पूजन किया गया और अंत में श्रीमद् भागवत कथा की आरती संपन्न हुई।

आचार्य प्रदीप गोस्वामी ने विधि-विधान के साथ पीठों का पूजन कराया। बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे। आरती में मुख्य यजमान; शांति पाराशर, शुभम पाराशर, अंजली पाराशर एवं पाराशर परिवार सम्मिलित रहे।