जबलपुर. ऐसी मान्यता है कि नागपंचमी के दिन सर्प यानि नाग के दर्शन हो जाएं तो सारे क्लेश और बाधाएं दूर हो जाती हैं। सावन माह के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के शुभ मुहूर्त पर पिसनहारी मढिय़ा की अन्नपूर्णा भोजन कक्ष में नाग निकल आया। पाकशाला में कार्य करने वाली महिला की नाग की फुफकार सुन चीख निकल गई। पाकशाला में नाग होने की खबर फैलते ही लोगों की भीड़ लग गई। नागपंचमी का त्योहार होने के चलते नाग कौतूहल का विषय बन गया। लोग पूजन करने पहुंचने लगे। इस दौरान मढिय़ा प्रबंधन ने सर्प विशेषज्ञ गजेन्द्र दुबे को सूचना दी। सूचना पर दोपहर 2.30 बजे सर्प विशेषज्ञ ने रेस्क्यू कर सर्प को पकड़ा, तब जाकर मढिय़ा प्रबंधन ने राहत की सांस ली।
भोजन शाला में बैठा था नाग
मेडिकल गढ़ा में पिसनहारी की मढिय़ा की पाकशाला में नाग निकलने की सूचना मिलते ही पाकशाला में नाग का दर्शन पाने लोगों की भीड़ लग गई। लोग दर्शन पाकर स्वयं का धन्य किया।
रेस्क्यू कर पकड़ा
सूचना पर पहुंचे सर्प विशेषज्ञ गजेन्द्र ने एक घंटे की मशक्कत के बाद सर्प को पकड़ा। गजेन्द्र ने बताया कि यह सर्प नाग प्रजाति का है, जो काफी विषैला होता है। पकड़े गए नाग की लंबाई साढ़े पांच फुट के करीब है। और इसकी आयु लगभग 6 माह है। सर्प विशेषज्ञ ने नाग को रेस्क्यू करने के बाद सुरक्षित बरगी के जंगल में छोड़ दिया।
छेडऩे पर हो जाता है आक्रामक
सर्प विशेषज्ञ गजेन्द्र दुबे ने बताया कि यह इस नाग प्रजाति के सर्प के डसने पर आधा घंटे में इलाज न मिले तो इंसान की मौत तय है। यह शांत स्वभाव का होता है, लेकिन छेडऩे पर यह आक्रामक हो जाता है।
ये है घटना
दोपहर 1 बजे भोजन शाला में कार्य करने वाली महिला ने नाग के फुफकारने की आवाज सुनी और इसकी सूचना मढिय़ा प्रबंधन को दी। किसी ने नाग निकलने की सूचना बाहन पहुंची तो देखते ही देखने लोगों की भीड़ लग गई। लोगों ने नागपंचमी का त्योहार होने के कारण सर्प का महत्व और बढ़ गया। लोगों ने अक्षत, फूल चढ़ाकर नाग की पूजा की।