
जबलपुर। सामाजिक सौहाद्र्र और भाईचारे का प्रतीक कजलिया पर्व मंगलवार को जबलपुर में धूमधाम से मनाया गया। एक ओर जहां महिलाएं अपने घरों की कजलियां परिजनों के साथ लेकर तालाबों के किनारे पहुंचीं, वहीं सबसे ज्यादा जनाकर्षण केन्द्र रहीं कजलियां लोगों के बीच चर्चा का विषय बनीं। डीजे की धुन पर नाचते गाते सुंदर किन्नरों को देखने लोगों की भीड़ सड़क के दोनों किनारों पर एकत्रित हो गई। फिल्मी गानों की धुन पर किन्नर कजलियां लेकर हनुमानताल पहुंचे। जहां विधि विधान से उनका विसर्जन कर सबके भले की प्रार्थना की।
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लकडग़ंज में शाम ४ बजे किन्नर समाज ने धूमधाम से कजलियां जुलूस निकाला। खटीक मोहल्ला, कोतवाली और सराफा क्षेत्र से होते हुए खुशी में शहनाई की धुन पर नाचते-गाते किन्नर निकले तो राहगीरों के भी पांव थिरकने लगे। हनुमानताल के किनारे भी किन्नरों ने झूमकर नृत्य किया। नर्मदा पंचकोसी परिक्रमा समिति के लोगों ने सराफा में पुष्पवर्षा कर किन्नर जुलूस का व किन्नर गुरु पूर्व पार्षद हीराबाई का स्वागत किया। जूलूस में किन्नर गुरु पद्मा, कैट शर्मा, बबली, खिलौना और संजना शामिल हुए।
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संस्कारधानी में मंगलवार को कजलियां की धूम रही। लोगों ने समूह में जलस्रोत के किनारे पहुंचकर पूजन किया। एक-दूसरे को कजलियां भेंटकर गले मिले और खुशी का इजहार किया। बुन्देलखंड और विंध्य क्षेत्र के प्रमुख पर्व में लोग अपने मित्रों-रिश्तेदारों के घर गए। मीठे पकवानों से मेहमानों की खातिरदारी की गई। कजलियां पर हनुमानताल में संस्कृति की झलक दिखी। दोपहर बाद क्षेत्र के लोगों का हुजूम तालाब की ओर पहुंचने लगा। उत्सव का नजारा दिखा।
गंगासागर तालाब हनुमान मंदिर के समीप कजलियां का मेला लगा रहा। पुरुष-महिलाएं घाट पर कजलियां धोने और लोगों ने मिलने में मगन थे। बच्चों ने झूला और खाने-पीने की चीजों से लुत्फ उठाया। इसी प्रकार नर्मदा के घाट, अधारताल तालाब, सदर तालाब **** अन्य जलस्रोत के किनारे कजलियां पर्व की रौनक दिखी। कजलियां पर्व सोशल मीडिया पर भी छाया रहा। जलस्रोत के समीप और रिश्तेदारों के घर जाने के अलावा लोगों ने फेसबुक, वाट्सएप और अन्य माध्यम से बधाई दीं।