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मनमानी की केबल… पोल पर लटक रहे तार, बदरंग हो रहा शहर, निगम बेपरवाह

परकोटा भी अछूता नहीं, विज्ञप्ति जारी कर कर भूल जाती शहरी सरकार

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जयपुर

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GAURAV JAIN

Sep 02, 2023

जयपुर. इंटरनेट और केबल कम्पनियां राजधानी की सूरत बिगाड़ रही हैं। बिजली के खंभों पर लटकते तारों के गुच्छों से स्ट्रीट लाइट के पोल झुक तक गए हैं, लेकिन इससे शहरी सरकारों को कोई लेना देना नहीं है। विश्व विरासत परकोटे से लेकर बाहरी इलाकों में इंटरनेट और केबल कम्पनियां मनमानी कर रही हैं। इस पर दोनों ही नगर निगम के अधिकारी कार्रवाई के नाम पर विज्ञप्ति जारी करने तक सीमित हैं। हैरानी की बात यह है कि निगम ने कम्पनियों को दो-दो बार नोटिस दिया, लेकिन कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने इसका जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझा।


हर जगह एक जैसा हाल
परकोटा क्षेत्र के बाजारों के डिवाइडर पर लगी स्ट्रीट लाइट के पोल पर तारों के गुच्छे लटक रहे हैं। एक पोल से दूसरे पोल तक तार जा रहे हैं। यही हाल टोंक रोड का भी है। विद्याधर नगर से लेकर वैशाली नगर, मानसरोवर, जगतपुरा में भी मनमानी की केबल शहर को बदरंग कर रही हैं।


खास-खास

-60 से अधिक इंटरनेट और केबल कम्पनियां हैं राजधानी जयपुर में

-07 के करीब कम्पनियों ने ही निगम से ले रखी है अनुमति

-02 बार हैरिटेज निगम जारी कर चुका है केबल हटाने की विज्ञप्ति


क्या कहते हैं नियम
– मुख्य मार्गों (सड़क की चौड़ाई 60 फीट से अधिक) के पोल पर केबल लगाने की स्वीकृति नहीं दी जाएगी।
हो यह रहा: पूरे शहर में इस नियम का उल्लंघन किया जा रहा है।
– केबल डालने के दौरान सड़क को क्रॉस नहीं किया जा सकेगा।
हो यह रहा : टोंक रोड से लेकर शहर की अन्य प्रमुख सड़कों पर इस नियम को भी तोड़ा जा रहा है।

राजस्व की हो रही हानि

30 जून को ग्रेटर निगम ने एक सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी की। इसमें लिखा कि सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था के लिए लगाए गए पोल पर डाली गई केबल की कोई स्वीकृति नहीं है। इससे न सिर्फ शहर की सुंदरता खराब हो रही है, बल्कि राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। पंद्रह दिन में इन केबल को हटा लिया जाए, नहीं तो निगम इनको जब्त कर लेगा और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई जाएगी।


जिम्मेदार
-शिप्रा शर्मा, उपायुक्त (राजस्व), ग्रेटर नगर निगम
-सरोज ढाका, उपायुक्त (राजस्व), हैरिटेज नगर निगम

इधर, अब तक जमा नहीं की बकाया राशि

ग्रेटर नगर निगम ने एसीटी कंपनी को मांग पत्र जारी किया। निगम ने कम्पनी से साढ़े आठ करोड़ रुपए मांगे। यह पैसा वर्ष 2018-19 से 2020-21 तक का है, लेकिन अब तक कम्पनी ने इस पैसे को निगम कोष में जमा नहीं करवाया है। इस कम्पनी ने निगम सीमा क्षेत्र में 6750 पोल और 3375 यूटिलिटी बॉक्स का उपयोग किया, लेकिन किराया नहीं दिया।