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जयपुर में बनेगा ई-वेस्ट पार्क , इलेक्ट्रॉनिक कचरा होगा रिसाइकल

घर में बेकार हो चुके कम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, फोन, एसी आदि को कबाड़ी वाले को देने या फैंकने की जगह आमजन आसानी से टोल फ्री नंबर के जरिए ई-वेस्ट रिसाइकलर तक पहुंचा सकेंगे।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Jun 05, 2023

घर में बेकार हो चुके कम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, फोन, एसी आदि को कबाड़ी वाले को देने या फैंकने की जगह आमजन आसानी से टोल फ्री नंबर के जरिए ई-वेस्ट रिसाइकलर तक पहुंचा सकेंगे। जिससे ना केवल पर्यावरण संरक्षित होगा बल्कि बेकार सामान रिसाइकल होकर फिर से नए रूप में काम में लिया जा सकेगा। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल सोमवार को लॉन्च की गई नई ई-वेस्ट प्रबंधन नीति के जरिए ई-वेस्ट की वस्तुओं की मरम्मत और उनके नवीनीकरण को बढ़ावा देगा। इसके लिए राजधानी जयपुर में ई-वेस्ट पार्क विकसित किया जाएगा। जहां घर-घर जाकर कबाड़ लेने वाले कबाड़ीवालों और कूड़ा बीनने वालों आदि से ई-वेस्ट संग्रह किया जाएगा। पार्क में परीक्षण प्रयोगशालाएं होंगी जहां बैटरी, प्लास्टिक और खतरनाक कचरे को रिसाइकल किया जाएगा।

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यह भी किया जाएगा काम

– राज्य की ई-वेस्ट प्रसंस्करण इकाईयों के लिए ग्रीनको रेटिंग सिस्टम होगा लागू।

– प्रदूषण नियंत्रण मंडल की साइट पर सभी अधिकृत संग्रह केंद्रों, रिसाइकलर्स आदि की जानकारी दी जाएगी, जिससे उपभोक्ता आसानी से ई-वेस्ट यहां दे सके।

– शहरी स्थानीय निकायों को इन संग्रह केंद्रों से जोड़ा जाएगा, इसके लिए एक ऑनलाइन मार्केट प्लेस वेबपोर्टल या मोबाइल एप पर विकसित होगा।

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इन विभागों को मिलकर करना होगा काम

नीति के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा के लिए पर्यावरण और जलवायु विभाग के प्रमुख शासन सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग नोडल विभाग और प्रदूषण नियंत्रण मंडल ई-वेस्ट नीति के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी होगा। नीति को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल के साथ श्रम विभाग, शहरी स्थानीय निकाय, सूचना प्रोद्यौगिकी विभाग, शिक्षा विभाग, राजस्थान राज्य औद्यौगिक विकास और निवेश निगम लिमिटेड, परिवहन विभाग मिलकर काम करेंगे।

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क्या है ई-वेस्ट ?

ई-वेस्ट आईटी कम्पनियों से निकलने वाला ऐसा अपशिष्ट है जो तकनीक में आ रहे बदलाव के कारण होता है। कम्प्यूटर, मोबाइल, फोन, टीवी, एसी, वॉशिंग मशीन आदि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और खिलौनों आदि के बेकार या अवधि पार होने के बाद इनका निस्तारण नहीं होता और यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।

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प्रदेश में ई-वेस्ट की स्थिति

2018-19 में 8478.00 एमटीए

2019-20 में 17028.00 एमटीए

2020-21 में 20816.00 एमटीए

तीन साल में कुल- 46233.00 एमटीए

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यह होगा फायदा

– ई-वेस्ट के प्रबंधन से उसे फिर से उपयोग में लाया जा सकेगा।

– उसे दूसरे उपकरण में तब्दील किया जा सकेगा।

– ई-वेस्ट रिसाइकलिंग प्रोसेस से कीमती धातु जैसे सोना, चांदी आदि को फिर से प्राप्त किया जा सकेगा। इससे कच्चे सामान के आयात में कमी आएगी।

– पर्यावरण अनुकूल तरीके से अपशिष्ट विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के संचालन, पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को मिलेगा बढ़ावा।

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