भारत निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक उम्मीदवारों की ओर से भरे जाने वाले फॉर्म संख्या-26 में संशोधन किया है। इससे चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवारों को अब उनके विरुद्ध दर्ज अपराधिक मामले की जानकारी चुनाव आयोग को देने के साथ साथ आम जनता को भी भली-भांति देनी होगी। इसके लिए उम्मीदवार को ये जानकारी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में व्यापक स्तर पर प्रचारित-प्रसारित करवाना भी अनिवार्य होगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि विधानसभा चुनाव के दौरान नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को शपथ-पत्र के साथ फॉर्म नंबर-26 में अपनी संपत्ति, शैक्षणिक योग्यता और यदि कोई आपराधिक मामले या मामला हो तो उसकी जानकारी अनिवार्य रूप से देनी होगी। उल्लेखनीय है कि हाल में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने इसमें संशोधन किया है।
मोटे अक्षरों में देनी होगी जानकारी
कुमार ने बताया कि उम्मीदवारों को नामांकन के दौरान मोटे अक्षरों में आपराधिक मामलों की जानकारी दर्शानी होगी। साथ ही, जिस पार्टी से टिकट ले रहे हैं उसे भी आपराधिक मामलों के बारे में सूचित करना होगा। राजनैतिक दलों को भी उम्मीदवारों से प्राप्त सूचना अपनी वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से दर्शानी होगी। इसके अलावा प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने के बाद आपराधिक मामलों की जानकारी (यदि कोई हो तो) प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में व्यापक तौर पर (कम से कम 3 बार) प्रकाशित और प्रसारित करवानी होगी।
३० दिन में देनी होगी पालना रिपोर्ट
कुमार ने बताया कि सभी राजनैतिक दलों को चुनाव सम्पन्न होने से 30 दिनों के भीतर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इसमें इस बात का स्पष्ट उल्लेख हो कि उनकी ओर से निर्देशों की पालना कर दी गई है।