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कोरोना महामारी, सरकारी आदेश न मानने पर हो सकती है सजा!

जयपुर। एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1897 के सेक्शन 2 को देश में लागू किया जा चुका है। अब राजस्थान में भी इस एक्ट के मुताबिक ही कोरोना वायरस से संबंधित एडवाइजरी पर काम किया जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से दुनियाभर में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद से कई देशों में हैल्थ इमरजेंसी लागू हो चुकी है।

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Tasneem Khan

Mar 13, 2020

जयपुर। एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1897 के सेक्शन 2 को देश में लागू किया जा चुका है। अब राजस्थान में भी इस एक्ट के मुताबिक ही कोरोना वायरस से संबंधित एडवाइजरी पर काम किया जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से दुनियाभर में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद से कई देशों में हैल्थ इमरजेंसी लागू हो चुकी है। अब भारत में भी ऐसे ही कदम उठाए जा रहे हैं। कई राज्यों की ओर से इसे महामारी घोषित करते हुए एडवाइजरी जारी की गई है। अब भारत सरकार ने सौ साल से ज्यादा पुराने हैल्थ एक्ट को लागू कर दिया है। महामारी घोषित हो जाने के बाद अब केंद्र सरकार एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1897 के सेक्शन 2 को लागू करने की घोषणा कर दी है। यह एक्ट देश में महामारियों के फैलने से रोकथाम के लिए सरकारी आदेश जारी करने की स्वतंत्रता को लेकर है। देश में कोरोना के बढ़ते प्रकोप को काबू करने के लिए अब भारत सरकार ने इस एक्ट को लागू किया है। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में इस 123 साल पुराने कानून Epidemic Disease Act 1897 के सेक्शन 2 को लागू करने का फैसला लिया गया है। एपिडेमिक डिजीज एक्ट, 1897 की धारा 2 के प्रावधानों को लागू करने का निर्णय कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक में 11 मार्च को लिया गया था। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा के मुताबिक बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा Epidemic Disease Act 1897 की धारा 2 के प्रावधानों को लागू करने की सलाह दी जानी चाहिए ताकि स्वास्थ्य मंत्रालय की सभी सलाहों को ठीक से लागू किया जाएं।

इस एक्ट में कुल 4 सेक्शन हैं। एक्ट के सेक्शन 2 में इसे लागू करने के लिए कुछ शक्तियां राज्य और सेक्शन 2 (A) की शक्तियां केंद्र सरकार को किसी महामारी को दूर करने या कण्ट्रोल करने के लिए दी गयीं हैं। इस बारे में वे जनता के लिए कोई भी आदेश जारी कर सकते हैं और इस हर हाल में मानना जरूरी होता है।
इस सेक्शन के मुताबिक जब राज्य सरकार को लगे कि महामारी फ़ैल रही है या फ़ैलने की आशंका है, तो राज्य सरकार अपने स्तर पर कुछ उपाय कर सकती है। इन उपायों में सबसे महत्वपूर्ण है कि लोगों को सार्वजनिक सूचना के जरिए रोग के प्रकोप या प्रसार की रोकथाम के तरीके बताएं जाएं और आम लोग उन तरीकों को आजमाएं ही।
वहीं इसके सेक्शन ए के मुताबिक केंद्र सरकार को ऐसा लगे कि भारत या उसके अधीन किसी भाग में महामारी फ़ैल चुकी है या फैलने की संभावना है तो वोकुछ कड़े कदम उठा सकती हैं। वहीं इस एक्ट का सेक्शन 3 कठोर है। इसे लागू किया जाता है तो महामारी के संबंध में सरकार द्वारा जारी आदेश न मानना अपराध होगा और इस अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता यानी इंडियन पेनल कोड की धारा 188 के तहत सज़ा भी मिल सकती है।