जयपुर। आपके बैंक अकाउंट में 100 रुपए है, लेकिन आपने बैंक से क्रेडिट में 251 रुपए ले लिए। अब उधारी के 151 रुपए चुका भी नहीं रहे, उलटे लगातार क्रेडिट लिए जा रहे हैं। इस स्थिति में अस्तित्व बचाए रखना मुश्किल है। बिल्कुल यही गंभीर हालात भूजल को लेकर सामने आए हैं। जमीन में जितना पानी रिचार्ज हुआ, उससे ज्यादा जमीन से पानी निकाल लिया गया। राजस्थान में भूजल दोहन दर 151.06 प्रतिशत है, जबकि जयपुर में तो 221.33 प्रतिशत पहुंच गई। यानि, रिचार्ज तो 100 लीटर हुआ, लेकिन जमीन से खींच लिया 221 लीटर पानी। भूजल आकलन अध्ययन में यह डराने वाली तस्वीर सामने आने के बाद सरकार जन भागीदारी से हालात पर काबू पाने में जुट गई है। स्वायत्त शासन विभाग ने ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी के लिए कहा है। जयपुर में 16 ब्लॉक बनाए गए हैं और अतिदोहित श्रेणी में आ गए हैं।
इस तरह समझें : जयपुर में रिचार्ज तो 67937 हेक्टेयर मीटर हुआ, जबकि भूजल दोहन 150365 हेक्टेयर मीटर किया गया। जबकि, राज्य में भूजल रिचार्ज दोहन दर 151.06 प्रतिशत है, जो वर्ष 2021 की तुलना में 0.84 प्रतिशत ज्यादा है।
यह है मुख्य कारण
-सरकार ने ट्यूबवैल खुदाई के लिए एनओसी प्रक्रिया की बंदिश हटा दी। इससे बेतरतीब तरीके से ट्यूबवैल बनाकर भूजल खींचा जा रहा है।
-शहरीकरण बढ़ता जा रहा है और साथ में औद्योगिक गतिविधियां भी।
-कई जगह टैंकर माफिया भी पनप गए हैं। सिंचाई, भवन निर्माण में भी भूजल सप्लाई कर रहे हैं। जबकि, कई जगह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से परिशोधित पानी उपलब्ध है।
रडार पर हैं हम, क्योंकि
-राज्य के 33 जिलों में से 27 जिले डार्क जोन में हैं।
-15 करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन जमीन से दोहन किया जा रहा है शहर में
-2 हजार अवैध ट्यूबवेलों से पानी खींचकर चांदी कूटने का खेल
-2 मीटर से औसतन भूजल स्तर गिर चुका पिछले एक वर्ष में
हमारी यह जिम्मेदारी
1. रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाएं : बिल्डिंग बायलाॅज में तो 225 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल के भूखंडों पर यह लागू है, लेकिन 50 वर्गगज भूखंड में भी यह बनाया जा सकता है।
2. स्टॉर्म वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मजबूत होगी : सड़क पर बहने वाले बारिश के पानी को सहेजने का बड़ा स्त्रोत है।जहां बने हैं वे बंद हैं या फिर ब्लॉक। इनका संचालन जरूरी।
3. कैच दर रेन में हो शामिल : पार्कों को ही इस तरह डवलप करें, जहां आस-पास इलाके का बारिश का पानी से भूजल स्तर बढ़ाया जा सके। कॉलोनियों में भूजल स्तर बढ़ेगा।
-रिचार्ज से ढाई से तीन गुना ज्यादा दोहन गंभीर स्थिति है। इसे रोका जा सकता है, बस जरूरत है सभी मिलकर आगे बढ़ने की। सरकार, विभाग तो काम कर ही रहे हैं, लेकिन इसमें प्रभावी जन भागीदारी अपेक्षित है। -सूरजभान सिंह, मुख्य अभियंता एवं परियोजना निदेशक, भूजल विभाग