24 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जयपुर

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का निधन

www.patrika.com

Google source verification

पणजी। गोवा के मुख्यमंत्री एवं पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का लंबी बीमारी के बाद रविवार को यहां निधन हो गया। वह 63 वर्ष के थे। पर्रिकर के परिवार में दो पुत्र उत्पल और अभिजीत हैं। उनकी पत्नी मेधा की 2001 में ही मृत्यु हो चुकी है। लंबे समय से बीमार और अग्नाशय कैंसर की अंतिम अवस्था से जूझ रहे पर्रिकर का पिछले एक वर्ष से गोवा, मुंबई , अमेरिका तथा नई दिल्ली के अस्पतालों में उनका उपचार चल रहा था। उन्होंने गोवा में पणजी के समीप दोना पाउला स्थित अपने निजी आवास में रविवार शाम अंतिम सांस ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोङ्क्षवद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई अन्य नेताओं ने श्री पर्रिकर के निधन पर शोक व्यक्त किया है। पर्रिकर वर्ष 2000 से 2005 और 2012 से 2014 की अवधि में गोवा के मुख्यमंत्री रहे। गोवा की राजनीति के बदलते घटनाक्रमों के बीच 13 मार्च 2017 को उन्होंने पुन: गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
सिद्धांतवादिता के पर्याय थे
सार्वजनिक जीवन में समर्पण, कार्यशीलता और सिद्धांतवादिता की विशिष्ट छवि को लेकर मनोहर पर्रिकर गोवा में ‘मि. क्लीनÓ के रूप में जाने जाते रहे हैं। तेरह दिसम्बर 1955 को जन्मे पर्रिकर ने 1978 में आई.आई.टी. मुम्बई से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। देश के किसी राज्य के मुख्यमंत्री रहे वह ऐसी पहली शख्सियत थे, जिन्होंने आई.आई.टी. से स्नातक किया। वर्ष 2001 में आई.आई.टी. मुम्बई की ओर से उन्हें विशिष्ट पूर्व छात्र की उपाधि भी प्रदान की गई थी।
रक्षा मंत्री के रूप में छोड़ी छाप
मनोहर पर्रिकर जब ९ नवम्बर २०१४ को देश के रक्षा मंत्री बनाए गए तब भारतीय सेनाएं हथियारों की अल्पता की स्थिति से जूझ रही थी, क्योंकि हथियारों की खरीद नहीं की जा रही थी। भारतीय वायुसेना के अधिकांश विमान पुराने पड़ गए थे तथा नए विमानों का अभाव था। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स द्वारा बनाए गए तेजस विमान को वायु सेना अपने उपयोग लायक नहीं मानती थी। पर्रिकर ने रक्षा मंत्री बनने के बाद सेना की स्थिति को गंभीरता से लिया तथा अल्प समय में ही सेना की जरूरतों की पूर्ति के लिए खरीद के ऑर्डर दिए।
तेजस को वायुसेना में शामिल कराया
पर्रिकर ने वर्षों से अनुपयोगी ठहराए जा रहे तेजस विमान को वायुसेना में शामिल करने के लिए क्लीयरेंस की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठाए तथ अंतत: वायुसेना ने इसे उपयोगी मानते हुए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। तेजस शुरू से ही उपयोगी था लेकिन पूर्व के रक्षा मंत्री इस पर निर्णय नहीं कर पाए। पर्रिकर आईआईटीयन थे इस कारण तकनीकी समझने में सक्षम थे। इससे तेजस को सही मुकाम मिल सका। उल्लेखनीय है कि भारत का तेजस पाकिस्तान व चीन द्वारा संयुक्त रूप से बनाए गए जेएफ-१७ से भी ज्यादा एडवांस है।