अश्विनी भदौरिया/जयपुर. जयपुर में शिवालयों की महिमा अपार है। आज हम आपको एक ऐसे अति प्राचीन मंदिर से रूबरू कराने जा रहे हैं। आमेर में सागर रोड़ स्थित अम्बिकेश्वर मंदिर जितना पुराना है, उतनी ही रोचक उसकी कहानी भी है। करीब 1000 साल पहले इस मंदिर की स्थापना बताई जाती है।
मंदिर के बारे में यह किवदंती है कि एक गाय जंगल में चरने जाती थी, तो वहां दूध खाली करके वापस आ जाती थी। एक बार ग्वाले ने गाय का पीछा किया और उस जगह को जाकर देखा। इस बारे में जब महाराज काकलदेव को पता चला तो उन्होंने खुदाई करवाई। इस दौरान वहां पर जमीन से नीचे शिवलिंग मिली। सावन-भादों माह में जमीन के नीचे से पानी आता है और इसी से भगवान शिव का अभिषेक होता है।
इतिहास के जानकार आनंद शर्मा बताते हैं कि पहले यहां पर शमशान हुआ करता था। यह शहर का एकमात्र शिवालय है, जहां पर शिवलिंग जमीन के नीचे है। सावन के दिनों में यहां पर भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। सावन में इस मंदिर में पूजा अर्चना का विशेष महत्व है। लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं।