
जयपुर। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक की शुरुआत होते ही मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। दरअसल, होलाष्टक शब्द होली और अष्टक दो शब्दों से मिलकर बना है। जिसका अर्थ होता है होली के आठ दिन। होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से शुरू होकर फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तक रहता है। इसी दिन से होली उत्सव के साथ-साथ होलिका दहन की तैयारियां भी शुरू हो जाती है। होलाष्टक के दौरान सभी ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं, जिसके कारण शुभ कार्यों का अच्छा फल नहीं मिल पाता है। इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ संस्कारों के लिए मुहूर्त नहीं रहेंगे।
होलाष्टक इस बार 6 मार्च को सुबह 10:51 बजे से शुरू होंगे, जो कि आठ दिन यानि होलिका दहन तक रहेंगे। इसके कारण इन आठ दिनों तक कोई भी शुभ कार्य, यज्ञ, शादी आदि नहीं होंगे। इस दौरान धार्मिक कार्य और खरीदारी तो की जा सकती है, लेकिन मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकेंगे। ज्योतिषाचार्य सुरेश शास्त्री ने बताया कि शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए ग्रहों का सौम्य होना जरूरी है। होलाष्टक के दौरान सभी ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं, जिसके कारण शुभ कार्यों का अच्छा फल नहीं मिल पाता है। ऐसे में आठ दिनों तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। होलाष्टक का आरंभ गुरुवार को सुबह 10.51 बजे से हो जाएगा, जो 14 मार्च तक दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा।