
जयपुर. महाशिवरात्रि पर यदि कोई ऐसा मंदिर मिल जाए जहां एकाध नहीं पूरे सौ से ज्यादा शिवलिंग नजर आ जाए तो फिर आस्था का सैलाब उमडऩा तय है। कुछ ऐसा ही नजारा देखना को मिलता है जागेश्वर महादेव मंदिर में। अल्मोड़ा (उत्तरांचल) से महज 35 किमी की दूरी पर स्थित इस धाम में 125 छोटे-बड़े मंदिर एक ही परिसर में निर्मित हंै। बारह ज्योतिर्लिंगों में से से एक यह शिव भक्तों के बीच आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है। खूबसूरत घाटी व देवदार के जंगी पेड़ों के बीच स्थित इस मंदिर में सर्वाधिक संख्या 108 शिव मंदिरों की है। मंदिरों से जुड़ी कई किंवदंतियां भी प्रसिद्ध हैं। सावन व शिवरात्रि के आस-पास यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु जुटते हैं। साथ ही अपने में इतिहास समेटे ये स्थापत्य की अपनी कहानी खुद बयां करते हैं।
जानकारी के अनुसार इन मंदिरों का निर्माण 7वीं से 18वीं शताब्दी ईस्वी के बीच करवाया गया था। ये मंदिर शिव व अन्य देवी देवताओं को समर्पित है। इनमें योगेश्वर (जागेश्वर), मृत्युंजय, नवदुर्गा, सूर्य, नवग्रह, लकुलीश,केदारेश्वर, बालेश्वर, पुष्टिदेवी, कालिका, लक्ष्मी देवी प्रमुख हैं। भारतीय पुरातत्व विभाग के मुताबिक 7वीं से 14वीं शताब्दी के बीच कत्यूरी शासकों ने इन मंदिरों का निर्माण व पुनराद्धार करवाया था। उसके बाद 15वीं शताब्दी में चंद शासकों की ओर से मंदिर को दान-पुण्य दिए जाने की जानकारी मिलती है। ऐसी मान्यता है कि पहले ये मंदिर काठ (लकड़ी) के बनाए गए थे बाद में इनको पत्थर से निर्मित करवाया गया।