सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बैंक खातों और मोबाइल कनेक्शन के के लिए आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने मनी लाउंड्रिंग एक्ट के तहत बैंक खातों को आधार से लिंक करने संबंधी संशोधन को निरस्त कर दिया है। जस्टिस एके सिकरी ने ये फैसला सुनाया। उनके फैसले के साथ चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और एएम खानविलकर भी शामिल हैं। जस्टिस सिकरी ने अपने फैसले में कहा है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए आधार जरुरी है। जस्टिस सिकरी ने कहा कि यूआइडीएआइ एक वैधानिक संस्था है। आधार निजता के अधिकार का हनन नहीं करता है क्योंकि इसमें न्यूनतम डाटा संग्रह किया जाता है। जस्टिस सिकरी ने कहा कि यूजीसी, नीट और सीबीएसई आधार को अनिवार्य नहीं कर सकते हैं। 18 साल से कम के बच्चों के अभिभावकों की सहमति ज़रूरी है। 18 साल से ऊपर के छात्रों को इससे बाहर जाने का विकल्प देना होगा। उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक डाटा की शेयरिंग बिना न्यायिक आदेश के नहीं की जा सकती है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में कहा है कि आधार को धन विधेयक के रूप में शामिल नहीं करना चाहिए । जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आधार को धन विधेयक के रुप में पारित करना एक धोखा है। लोकसभा के स्पीकर के फैसले की न्यायिक समीक्षा हो सकती है। जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि आधार से मोबाइल कनेक्शन और बैंक खातों को लिंक करना असंवैधानिक है।
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