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मानवेन्द्र की राहुल से नजदीकी!, धोरों पर ‘सियासी भूचाल’

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पश्चिमी राजस्थान में भाजपा के दिग्गज नेता जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्र सिंह की कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से नजदीकी प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं को ज्यादा रास नहीं आ रही! इनमें भीतरखाने डर है कि अब हर मामले में उनकी सीधी बात राहुल से होगी। ऐसे में मानवेन्द्र का कद पार्टी में बढ़ेगा तो इसका नुकसान सीधे तौर पर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को ही होगा। बाड़मेर के शिव विधायक मानवेन्द्र, उनकी पत्नी चित्रा सिंह और छोटे भाई ने कल नई दिल्ली में राहुल गांधी के घर पर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान प्रदेश के आधा दर्जन वरिष्ठ नेता ही मौजूद थे। कांग्रेस में आने की शर्त को लेकर मानवेन्द्र ने स्पष्ट कहा कि राहुल और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट से उनके पुराने संबंध हैं। वे बिना किसी शर्त आए हैं।

बता दें कि पश्चिमी राजस्थान में मानवेन्द्र के पिता जसवंत सिंह का भाजपा में बड़ा नाम है। पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के समय से ही उनका कद बड़ा था। जबकि कांग्रेस में पश्चिमी राजस्थान में अभी बड़ा नाम कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत का है। मानवेन्द्र बाड़मेर से ताल्लुक रखते हैं। यहां कांग्रेस की ओर से पूर्व सांसद हरीश चौधरी की दावेदारी रही है। नजदीकी सूत्रों के मुताबिक मानवेन्द्र के कांग्रेस में आने की खबरों के बाद हरीश चौधरी ने नाराजगी जाहिर की थी। लेकिन राहुल गांधी की ओर से मानवेन्द्र को हर हाल में पार्टी में शामिल किए जाने की जानकारी वरिष्ठ नेताओं ने दी और नाराजगी के बजाय खुशी से स्वागत करने की बात कही थी। यही वजह है कि एआइसीसी में मानवेन्द्र को जब मीडिया के सामने लाया गया तो चौधरी को उनकी बगल वाली सीट पर बड़े नेताओं ने ही बिठाया।
{vo-2}…अब जब मानवेन्द्र कांग्रेस में आ गए हैं, तो बड़े नेता उनके स्वागत की बात तो कर रहे हैं। लेकिन एकाध नेता को छोड़ ज्यादातर खास खुश नहीं हैं। इसकी मुख्य वजह है मानवेन्द्र का कद उनके पिता के केंद्र में लंबे समय तक मंत्री रहने के कारण पहले से ही बड़ा है। फिर मानवेन्द्र के सीधे संपर्क राहुल से हैं।
{vo-3}… पहले जयपुर में होटल जयमहल पैलेस जमीन विवाद, चतर सिंह हत्याकाण्ड और आनन्दपाल एनकाउंटर सहित अन्य प्रकरणों को लेकर भाजपा से नाराज माने जा रहे राजपूत समाज के दिग्गज नेता मानवेन्द्र सिंह के काग्रेस पार्टी में जाने से मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान में फर्क पड़ेगा। हाल ही उन्होंने स्वाभिमान रैली कर अपनी ताकत दिखाई थी। ऐसे में इस क्षेत्र के राजपूत समाज का वोट बैंक का कांग्रेस पार्टी की ओर झुकाव होगा। हालांकि भाजपा से जुड़े राजपूत नेता इसे निराधार मानते हैं। केंद्रीय मंत्री राजवर्द्धन सिंह के मुताबिक राजपूत समाज शुरू से भाजपा के साथ है और रहेगा।
मानवेन्द्र के चुनाव मैदान में उतरने को लेकर अभी कांग्रेस की ओर से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन माना जा रहा है कि वे लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी चित्रा सिंह या फिर छोटे भाई को टिकट दिया जा सकता है। इधर, सूत्रों की मानें तो अब कांग्रेस का अगला कदम जैसलमेर के पूर्व राजघराने की ओर है। वहां पूर्व राजघराने की राजेश्वरी राज्यलक्ष्मी विधानसभा चुनाव को लेकर जनसंपर्क कर रही हैं। हालांकि उन्होंने अभी किसी पार्टी में जाने को लेकर कुछ नहीं कहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से हाल ही सभी सीटों पर कराए गए सर्वे में राजेश्वरी राज्यलक्ष्मी का नाम मजबूत उम्मीदवार के रूप में आया है। ऐसे में कांग्रेस का सम्पर्क अभियान अंदर खाने शुरू हो चुका है। इधर, प्रदेश के किसान नेता रामपाल ने भाजपा का दामन छिटक कर आम आदमी पार्टी की राह पकड़ ली है। ऐसे में ये बात दीगर है कि मानवेन्द्र और रामपाल के रूप में भाजपा को लगे दो बड़े झटकों ने धोरों में नए सियासी समीकरण को जन्म दिया है। अब देखना ये होगा कि राजपूत और जाट बिरादरी के इन दो बड़े नेताओं का पाला बदल आगामी चुनावों में कितना असर छोड़ता है।