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राजस्थान में शिक्षा के नवाचार दूसरे राज्यों के लिए अनुकरणीय – जाहिदा खान

शिक्षा राज्य मंत्री जाहिदा खान (Minister of State for Education Zahida Khan ) ने कहा कि राजस्थान में प्रारम्भिक बाल्यावस्था में बच्चों की देखभाल और उनकी शिक्षा 'अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन' ('Early Childhood Care and Education',) पर विशेष फोकस करते हुए कई नवाचार किए जा रहे हैं, जो देश के अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Mar 23, 2023

शिक्षा राज्य मंत्री जाहिदा खान (Minister of State for Education Zahida Khan ) ने कहा कि राजस्थान में प्रारम्भिक बाल्यावस्था में बच्चों की देखभाल और उनकी शिक्षा ‘अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन’ (‘Early Childhood Care and Education’,) पर विशेष फोकस करते हुए कई नवाचार किए जा रहे हैं, जो देश के अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है। प्रदेश के लिए यह गर्व का विषय है कि आंगनबाड़ी केन्द्रों को स्कूलों में समाहित करने जैसे राजस्थान के नवाचारों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शामिल किया गया है।
खान गुरुवार को जयपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से भारत में प्रारम्भिक बाल्यावस्था की देखभाल और शिक्षा की गुणवत्ता एवं सार्वभौमीकरण के लिए शासन के अभिसरण और प्रबंधन पर दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के तौर पर सम्बोधित कर रही थी। कार्यशाला में 16 राज्यों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
68 हजार से अधिक स्कूलों में स्कूल रेडीनेस प्रोग्राम लागू
शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि राजस्थान के करीब 68 हजार से अधिक स्कूलों में स्कूल रेडीनेस प्रोग्राम को लागू किया है। वर्तमान में प्रदेश में एकीकृत बाल विकास योजना के तहत करीब 62 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन हो रहा है। इनमें से प्रारम्भिक बाल्यावस्था में बच्चों देखभाल और शिक्षा पर फोकस करते हुए 42 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों को शिक्षा विभाग के साथ जोड़ा जा चुका है। उन्होंने कहा कि बाल्यावस्था में 1 से 6 वर्ष की आयु में बच्चों के सर्वोत्तम विकास को सबसे नाजुक माना गया है। राज्य सरकार द्वारा इस लिहाज से समय की आवश्यकता के अनुरूप ईसीसीई के महत्त्वूपर्ण घटकों की पहचान कर इस दिशा में जोर-शोर से कार्य किया जा रहा है।
स्कूलों में लागू किया नो बैग डे- डॉ. मोहन लाल
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के आयुक्त और राज्य परियोजना निदेशक डॉ.मोहनलाल यादव ने कहा कि बच्चों पर आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूल और घर पर अनावश्यक मानसिक दबाव को खत्म करने के लिए राजस्थान में इस स्तर की पाठ्यपुस्तकों का संक्षिप्तीकरण करते हुए कोर्स को कम करने और शनिवार को नो बैग डे जैसा नवाचार लागू करने की पहल की गई है। प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों को स्कूलों में समाहित करते हुए अब तक 37 हजार से अधिक आंगनबाडिय़ों में चाइल्ड फ्रेंडली फर्नीचर और 34 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए आउटडोर खेलों की सामग्री उपलब्ध कराई गई हैं।
एनआईईपीए की प्रोफेसर डॉ. रश्मिता दास ने ईसीसीई पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश में 3 से 6 साल तक के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी सरकारों द्वारा वहन की जा रही है। कार्यशाला में राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद, जयपुर और राजस्थान शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उदयपुर से जुड़े अधिकारी और अन्य शिक्षाविदें ने भी शिरकत की।