जयपुर। घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने,यह कहावत इन दिनों राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल पर सटीक बैठ रही है। आर्थिक स्थिति डांवाडोल के बावजूद मंडल सरकार की विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं में हर साल लाखों रुपए खर्च कर रहा है। दूसरी तरफ, शिक्षा निदेशालय से भुगतान नहीं होने के कारण कार्मिक असुरक्षित महसूस कर रहे है। वर्तमान में यहां कार्यरत कार्मिकों का कहना है कि यदि मंडल इसी तरह से पैसा खर्च करता रहा, तो उनके वेतन और पेंशन के भी लाले पड़ जाएंगे।
573.07 करोड़ अटकाए फिर भी लाखों खर्च
शिक्षा निदेशालय के पास मंडल का 573.07 करोड़ रुपए अटके पड़े हैं। इसके बावजूद मंडल शिक्षा विभाग की ओर से संचालित की जा रही शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यास योजना, मुख्यमंत्री विद्यादान कोष, भामाशाह सम्मान समारोह, गार्गी पुरस्कार, शिक्षकों का सम्मान, शिक्षा विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों के पुरस्कार, खेलकूद गतिविधियों में अनुदान योजना के साथ ही डीएसएलआर के संचालन के लिए लाखों रुपए का आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है।
मंडल का योगदान, कार्मिकों पर भारी
मंडल की ओर से 15 अगस्त 2022 में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत झंडारोहण के लिए 4 करोड़ रुपए का भुगतान मंडल ने शिक्षा विभाग को किया। इतना ही नहीं, शिक्षक सम्मान समारोह के लिए 81 लाख 43 हजार 600 रुपए, पिछले साल के शिक्षक सम्मान समारोह के लिए 63 लाख 10 हजार रुपए मंडल ने शिक्षा विभाग को दिए गया। वर्ष 2020 और 2021 में मंत्रालयिक और सहायक कर्मचारी पुरस्कार और सम्मान समारोह 2021 के लिए कुल मिलाकर 8 लाख 80 हजार रुपए, वर्ष 2020 में शिक्षक सम्मान समारोह के लिए 63 लाख 10 हजार रुपए शिक्षा विभाग को दिए।
इनका कहना है
पाठय पुस्तक मंडल सरकार का ही एक भाग है और हम नो प्रॉफिट नो लॉस में काम कर रहे हैं। ऐसे में हमारे पास जो अमाउंट सरप्लस होता है उसका उपयोग हम सरकार की शैक्षणिक विकास में योगदान देने वाली योजनाओं में करते हैं।
विनोद पुरोहित, सचिव
राजस्थान राज्य पाठय पुस्तक मंडल