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Ravindra Manch पर नाटक ‘रसिक सम्पादक’ – आज भी नहीं बदली महिला के प्रति मानसिकता

यूनिवर्सल थियेटर एकेडमी जयपुर की ओर से तीसरे 'यूटीए लघु नाट्य समारोह' का आगाज रवींद्र मंच पर शनिवार से हुआ। मंच के मिनी थियेटर में पहले दिन नाटक 'रसिक सम्पादक' का मंचन किया गया। मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित इस नाटक में शारीरिक सौन्दर्य के पीछे भागने वाले व्यक्ति के चारित्रिक पतन को व्यंग्यात्मकता के साथ मंचित किया गया।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Feb 25, 2023

यूनिवर्सल थियेटर एकेडमी जयपुर की ओर से तीसरे ‘यूटीए लघु नाट्य समारोह’ का आगाज रवींद्र मंच पर शनिवार से हुआ। मंच के मिनी थियेटर में पहले दिन नाटक ‘रसिक सम्पादक’ का मंचन किया गया। मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित इस नाटक में शारीरिक सौन्दर्य के पीछे भागने वाले व्यक्ति के चारित्रिक पतन को व्यंग्यात्मकता के साथ मंचित किया गया। नाटक में दिखाया गया कि 21वीं सदी में पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के बावजूद महिलाओं के प्रति लोगों की मानसिकता में बदलाव नहीं हुआ। नाटक में अपने संपादक को सबक सिखाने की दृष्टि से एक पत्रकार योजना बनाता है और सफल रहता है। नाटक का निर्देशन मनोज स्वामी ने किया और नाटक की प्रस्तुति नाद सोसायटी जयपुर की ओर से की गई। नाटक में मुख्य भूमिका में मुकेश कुमार सैनी,मनोज स्वामी और जिवितेश शर्मा ने निभाई। मंच पाश्र्व में संगीत जितेन्द्र शर्मा बिल्लू, प्रकाश व्यवस्था अनिल मारवाड़ी, मंच सज्जा तपेश शर्मा और सागर गढ़वाल, रूपसज्जा रवि बांका, वस्त्रसज्जा रेणु सनाढ्य की रही।

 

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वहीं दूसरे नाटक ‘नरेन अके ला’ भीड़ है कयामत की और हम अकेले हैं वाक्य को चरितार्थ करता हुआ नजर आया। इंडियन थियेटर सोसायटी की ओर से प्रस्तुत नाटक में बताया गया कि जन्म के साथ ही मनुष्य समाज के नियमों, रीति रिवाजों तथा परम्पराओं से खुद को घिरा हुआ पाता है। भारतीय समाज में अनेकों ऐसी परम्परा और सभ्यताएं हैं, जिनकी वजह से भारतीय संस्कृति अपना अलग स्थान रखती है लेकिन वर्तमान समय में कुछ परम्पराओं ने ऐसा बिगड़ा स्वरूप धारण कर लिया है कि मनुष्य चाहकर भी उनसे बाहर नही निकल पा रहा है और मकड़ी के जाले की भांति परम्पराओं के बीच फंसकर स्वयं अपना अस्तित्व खोता रहा है। यही तानाबाना है नाटक ‘नरेन अकेला’ का। नाटक में अभिनय एवं निर्देशन महेश महावर ने किया है। नाटक में पाश्र्व संगीत प्रताप सिंह राजावत, रूपसज्जा एवं लाइट केशव गुप्ता, मंचसज्जा हसीब खान, मीना गिडवानी की रही। नाटक का लेखन नरेन्द्र बबल और निर्देशन महेश महावर का है।