जयपुर।
राज्य स्तरीय संस्कृत दिवस सम्मान समारोह में पहली बार संस्कृत शिक्षा विभाग से मंत्रालयिक संवर्ग के संस्थापन अधिकारी प्रवीण भार्गव और प्रशासनिक अधिकारी श्याम गोस्वामी को मंत्रालयिक सेवा सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। इन्हें पुरस्कार स्वरूप 11 हजार रुपए और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करेंगे ।गौरतलब है कि संस्कृत शिक्षा विभाग ने पिछले कई वर्षों से मंत्रालयिक संवर्ग कर्मचारियों के सम्मान समारोह का आयोजन नहीं होता था। मंत्रालयिक संवर्ग लगातार यह मांग कर रहे थे। विभाग की ओर से इस संबंध में बनाए गए प्रस्ताव के बाद सरकार ने सामान्य शिक्षा विभाग में होने वाले सम्मान समारोह की तरह संस्कृत शिक्षा विभाग में भी मंत्रालयिक संवर्ग का मंत्रालयिक सेवा सम्मान के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
निदेशालय संस्कृत शिक्षा में पिछले 43 वर्षों से कार्यरत संस्थापन अधिकारी प्रवीण भार्गव और 40 वर्षों से कार्यरत श्याम गोस्वामी का पहली बार सम्मान के लिए चयन किया है। दोनों निदेशालय संस्कृत शिक्षा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनकी पहली प्राथमिकता निदेशालय में बाहर से आने वाले अध्यापकों का कार्य तत्काल प्रभाव से करवाना उन्हें किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो । गौरतलब है दोनों मृत राज कर्मचारी कोटे में अनुकम्पा नियुक्ति पर लगे थे इतनी लंबी सर्विस में पहली बार सम्मान होने पर भार्गव ओर गोस्वामी ने खुशी जताई।
डॉ.सीताराम दोतोलिया को संस्कृत विद्वत सम्मान
राजधानी जयपुर स्थित बिलोंची कस्बे निवासी डॉ.सीताराम दोतोलिया को शुक्रवार को जेएलएन मार्ग स्थित इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान में होने वाले राज्य स्तरीय संस्कृत दिवस सम्मान समारोह में संस्कृत विद्वत सम्मान से सम्मानित होंगे। वहीं ा विभाग से मंत्रालयिक संवर्ग के संस्थापन अधिकारी प्रवीण भार्गव और प्रशासनिक अधिकारी श्याम गोस्वामी को मंत्रालयिक सेवा सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।डॉ.सीताराम दोतोलिया गोविन्दी देवी सहरिया राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय कालाडेरा में प्राचार्य पद पर कार्यरत हैं।
संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ.बीडी कल्ला, शिक्षा राज्य मंत्री जाहिदा खान, निम्बार्क पीठाधीश्वरश्याम शरण देवाचार्य श्रीजी महाराज, अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके गोयल, संस्कृत शिक्षा निदेशक डॉ.भास्कर शर्मा उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगे। सम्मान स्वरूप उन्हें 31 हजार रुपए और प्रशस्ति पत्र भेज किया जाएगा। गौरतलब है कि डॉ.दोतोलिया आशुकवि पण्डित रामस्वरूप दोतोलिया के ज्येष्ठ पुत्र हैं, इन्होंने अब तक संस्कृत में 15 ग्रंथों की रचना की है। जिनमें काव्यप्रकाश पर संपूर्ण राजस्थान में सर्वप्रथम आनंद संस्कृत टीका और संतोष हिंदी टीका इनके द्वारा ही लिखी गई है जिसे देश के कई विवि में पढ़ाया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त संकल्प नाम से 41 हिंदी कथाएं भी लिखी गई हैं, किसी संस्कृत विद्वान की ओर से प्रदेश में सर्वप्रथम 41 मौलिक हिन्दी कथाएं डॉ.दोतोलिया ने ही लिखी गई हैं। डॉ.दोतोलिया संपादित राजस्थान दर्शन काव्य में संपूर्ण राजस्थान के ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहरों का श्लोकबद्ध वर्णन किया गया है। कालाडेरा संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य पद पर रहते हुए सीमित संसाधनों के बावजूद नेट द्वारा कॉलेज को बी ग्रेड प्रदान कराई। कालाडेरा में ही यूजीसी से 90 लाख रुपए की राशि प्राप्त कर संस्कृत शिक्षा का सर्वप्रथम इनडोर स्पोट्र्स स्टेडियम का निर्माण भी करवाया है।