#savearavali अरावली को लेकर छिड़ी बहस के बीच environmentalists पर्यारवणविदों ने राजस्थान में कम हो रहे Desert gerbil रेगिस्तानी चूहों को लेकर भी चिंता जताई है।University of Rajasthan राजस्थान विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर प्रताप चंद माली Professor Pratap Chand Mali का कहना है कि रेगिस्तानी चूहों की संख्या लगातार घट रही है। जो पर्यावरण के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। पर्यावरणविद् एवं पक्षी विशेषज्ञ डॉ. दाऊलाल बोहरा के अनुसार थार का पारिस्थितिक संतुलन केवल टीलों और पौधों पर नहीं, बल्कि इन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण स्तनधारियों पर भी निर्भर है, जो मरुस्थल की जैव विविधता की असली पहचान हैं। भूमि-उपयोग परिवर्तन, सिंचाई विस्तार और प्राकृतिक शुष्कता में कमी जैसी परिस्थितियों के कारण इन प्रजातियों की उपस्थिति में बदलाव आ सकता है। थार की प्रमुख प्रजातियों में भारतीय मरुस्थली जिर्ड, भारतीय जेरबिल (एंटीलोप रैट), हेयरीफुटेड जेरबिल, शॉर्ट-टेल्ड बैंडिकूट रैट और लिटिल इंडियन फील्ड माउस Desert gerbil, Indian gerbil, antelope rat, hairy-footed gerbil, short tailed bandicoot rat, little Indian field mouse हैं।