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तीन शब्दों राम-कृष्ण-हरि से जगाई भक्ति की लौ

मुंबई की संस्था पंचम निषाद की ओर से शनिवार को जयपुर में पहली बार 'बोलावा विठ्ठल अभंग वाणी' संगीत समारोह आयोजित किया गया। महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में आयोजित इस समारोह में दक्षिण भारत के जाने-माने गायक जयतीर्थ मेउंडी और रंजनी-गायत्री ने एक से बढक़र एक अभंग रचनाओं के जरिए संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Jul 16, 2022

तीन शब्दों राम-कृष्ण-हरि से जगाई भक्ति की लौ
जयपुर में पहली बार आयोजित हुआ ‘बोलावा विठ्ठल अभंगवाणी’ संगीत समारोह
दक्षिण भारत के नामी गायक जयतीर्थ मेवुंडी और रंजनी-गायत्री ने दी प्रस्तुति
मतभेद होता है लेकिन मनभेद कभी नहीं हुआ-रंजनी-गायित्री
रातों रात स्टार बनना चाहती है युवा पीढ़ी-जयतीर्थ मेउंडी
जयपुर। मुंबई की संस्था पंचम निषाद की ओर से शनिवार को जयपुर में पहली बार ‘बोलावा विठ्ठल अभंग वाणी’ संगीत समारोह आयोजित किया गया। महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में आयोजित इस समारोह में दक्षिण भारत के जाने-माने गायक जयतीर्थ मेउंडी और रंजनी-गायत्री ने एक से बढक़र एक अभंग रचनाओं के जरिए संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया। तीनों कलाकारों ने इस मौके पर 12वीं शताब्दी के महाराष्ट्र और कर्नाटक के नामदेव, तुकाराम, ज्ञानेश्वर और बहिना बाई जैसे संतों के लिखे गए अभंगों की संगीतमयी प्रस्तुति दी। अभंग का अर्थ होता है ईश्वर की स्तुति में लिखी गई काव्यात्मक रचनाएं।
तीन शब्दों राम-कृष्ण-हरि से जगाई भक्ति की लौ
कार्यक्रम की शुरुआत गायक जयतीर्थ मेउंडी और रंजनी व गायत्री की तिगुलबंदी से हुई। तीनों कलाकारों ने तीन शब्दों राम-$कृष्ण- हरि को सुर, लय और ताल की अलग अलग इकाईयों में पिरोकर करीब पन्द्रह मिनट तक भक्ति की अलख जगाए रखी। इस रचना की खासयित ये थी कि इसमें कलाकारों ने इन तीन शब्दों को ही अपनी सांगीतिक प्रस्तुति का माध्यम बनाया। इसके बाद रंजनी और गायत्री ने संत तुकाराम का अभंग प्रस्तुत किया जिसमें दक्षिण भारत के प्रमुख तीर्थ स्थल पंढरीपुर की अलौकिक महिमा का गुणगान किया गया। इसमें बाद उन्होंने बोलावा वि_ल नामक अभंग भी प्रस्तुत किया। राग भटियार पर आधारित इस अभंग में भगवान वि_ल के कृतित्व और व्यक्ति का गुणगान किया गया।
जयतीर्थ ने सुनाया स्व.पं. भीमसेन जोशी का अभंग
किराना घराना शैली के गायक जयतीर्थ मेउंडी ने इस मौके पर भारत रत्न स्वर्गीय पंडित भीमसेन जोशी का अभंग तीर्थ वि_ल क्षेत्र वि_ल सुनाया। अनेक राग-रागनियों के मिश्रण से बने इस अभंग की लय-ताल में समाए भक्ति रस ने वहां मौजूद लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मतभेद होता है, मनभेद नहीं- रजनी-गायित्री
कार्यक्रम से पहले पत्रकारों से बातचीत में गायिका रंजनी और गायित्री ने कहा कि हम दोनों बहिनें हमेशा साथ ही गाती हैं, अब तक की सांगीतिक यात्रा में बहुत की कम ऐसे मौके आए हैं जब हमने अलग-अलग गाया हो। उन्होंने कहा प्रस्तुतिकरण को लेकर हम दोनों में कई बार मतभेद होता है लेकिन मनभेद हमारे बीच कभी नहीं हुआ। जब भी संगीत को लेकर कोई मतभेद होता है तो हम उसे संगीत के व्यापक चित्रण को सामने रखकर सुलझा लेते हैं।
रातों रात स्टार बनना चाहती है युवा पीढ़ी-जयतीर्थ मेउंडी
किराना घराने के गायक जयतीर्थ मेउंडी ने शास्त्रीय संगीत के भविष्य पर चली बातचीत में कहा कि आज की युवा पीढ़ी के भीतर समर्पण का भाव नहीं है, ये लोग जल्दी ही नाम और पैसा कमाने चाहते हैं जबकि शास्त्रीय संगीत में धैर्य ही सबसे पहली शर्त होती है इसको सीखने के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता है।
सोलह साल से आयोजित हो रहा है बोलावा वि_ल समारोह
पंचम निषाद क्रिएटिव्स के निदेशक शशि व्यास ने बताया कि ये संस्था पिछले सोलह साल से भारत के विभिन्न प्रान्तों में आषाढ़ी एकादशी के मौके पर यह समारोह आयोजित करती आ रही है। इस साल हमने जयपुर को भी इस अनूठे कार्यक्रम के लिए चुना है। कार्यक्रमों की क्रमबद्ध श्रंखला के रूप में यह समारोह इस बार भारत के नौ शहरों में आयोजित किया जा रहा है। इसकी शुरूआत 1 जुलाई को बैंगलुरू से की गई थी और 24 जुलाई को इसका समापन मैंगलौर में होगा।