21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जयपुर

वट सावित्री व्रत 2023 : सुहागिनें भूलकर भी आज नहीं करें ये काम

  बन रहे तीन दुर्लभ संयोग

Google source verification

जयपुर

image

Savita Vyas

May 19, 2023


जयपुर। आज अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला वट सावित्री व्रत है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं। आज तीन दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं। इसी के साथ आज ही के दिन दर्श अमावस्या भी मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता सावित्री अपने पति सत्यवान को यमराज से छीनकर वापिस ले आई थीं।
पूजन विधि
वट वृक्ष के नीचे सावित्री सत्यवान और यमराज की मूर्ति स्थापित करें। आप चाहें तो इनकी पूजा मानसिक रूप से भी कर सकते हैं। वट वृक्ष की जड़ में जल डालें, फूल-धूप और मिठाई से पूजा करें। कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष की परिक्रमा करते जाएं। सूत तने में लपेटते जाएं। उसके बाद 7 बार परिक्रमा करें। हाथ में भीगा चना लेकर सावित्री सत्यवान की कथा सुनें। फिर भीगा चना, कुछ धन और वस्त्र अपनी सास को देकर उनका आशीर्वाद लें। वट वृक्ष की कोंपल खाकर उपवास समाप्त करें।
क्यों होती है बरगद की पूजा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष (बरगद) एक देव वृक्ष माना जाता है। ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सावित्री भी वट वृक्ष में रहते हैं। प्रलय के अंत में श्रीकृष्ण भी इसी वृक्ष के पत्ते पर प्रकट हुए थे। तुलसीदास ने वट वृक्ष को तीर्थराज का छत्र कहा है। ये वृक्ष न केवल अत्यंत पवित्र है बल्कि काफी ज्यादा दीर्घायु वाला भी है। लंबी आयु, शक्ति, धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर इस वृक्ष की पूजा होती है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस वृक्ष को ज्यादा महत्व दिया गया है।

इन बातों को रखें ध्यान
इस दिन काले या नीले कपड़े ना पहनें।
बरगद की टहनी न तोड़ें।
बरगद की उल्टी परिक्रमा नहीं करें।
काली चूड़ियां न पहनें। सोलह श्रृंगार करके ही पूजा करें।
इस दिन जीवनसाथी के साथ लड़ाई-झगड़े से भी बचें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
अगर आप गर्भवती हैं तो आप वट सावित्री के दिन पूजन जरूर करें लेकिन बरगद की परिक्रमा करने से बचें।
वट सावित्री की कथा अधूरी नहीं छोड़ें इससे इसका पूर्ण फल नहीं मिलता है।
आप पूजा में घी का दिया जला रही हैं तो उसे दायीं तरफ रखें। अगर आप तेल का दीपक जला रही हैं तो उसे बाएं तरफ रखें।1 पूजा सामग्री को हमेशा बाई तरफ रखें। ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।