
जांजगीर-चांपा. अकलतरा विकासखंड अंतर्गत झलमला ग्राम पंचायत में इन दिनों ग्राम पंचायत सरपंच व सचिव के खिलाफ पूरा गांव उमड़ पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की सरपंच आदिवासी महिला है। उसके भोलेपन का फायदा उठाकर ग्राम सचिव मनाराम केंवट विकास की राशि का बंदरबांट कर रहा है। इतना ही नहीं उसने क्षेत्र के कोयला कारोबारियों से लेन-देन करके गांव की लगभग ८२ एकड़ जमीन को एक निजी एनजीओ के हांथ में देने की साजिश रची है। उसने फर्जी बैठक बुलाकर आम सहमति के बल पर झूठा प्रस्ताव भी पास कर दिया। इस मामले की शिकायत ग्रामीणों ने कलेक्टर के जनदर्शन में पहुंच कर की थी। इसके बाद इस मामले को पत्रिका ने प्रमुखता के साथ उठाया था।
मामले पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने अकलतरा जनपद सीईओ और एसडीएम जांजगीर को मामले की जांच के निर्देश दिए थे। एसडीएम ने जांच की जिम्मेदारी तहसीलदार सूयकांत साय को सौंपी। जांच के दौरान ग्रामीणों और सरपंच सचिव का बयान लने के लिए गांव में ही शनिवार दोपहर १२ बजे जन सुनवाई बुलाई गई। तय कार्यक्रम के मुताबिक १२ बजे स्कूल ग्राउंड में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण जमा हो गए, लेकिन अधिकारी बार-बार आश्वासन देते हुए दोपहर तीन बजे पहुंचे।
इसके बाद उनके द्वारा ग्रामीणों के बयान दर्ज कर उनके आरोपों को लिपिबद्ध किया गया और उसके बाद हर एक आरोप पर सरपंच और सचिव के बयान भी दर्ज किए गए। बयान के दौरान ग्रामीणों में जमकर गुस्सा देखा गया और वह सरपंच सचिव पर ग्राम के विकास की राशि खा जाने का आरोप लगाते रहे। वहीं सरपंच सचिव अपने आपको निर्दोष बताते हुए गोल-मोल जवाब देते हुए नजर आए।

गांव के लोगों ने बयान में बताया कि किस तरह सरपंच व सचिव ने मिलकर पानी टंकी से लेकर स्कूल तक सीसी रोड निर्माण और नाली निर्माण के नाम पर लाखों रुपए का आहरण किया, लेकिन हकीकत यह है कि दोनों ही कार्य आज तक नहीं हुए है। सरपंच सचिव ने इस राशि का कोई आहरण नहीं होना बताया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरपंच सचिव ने उडिय़ा तालाब की सफाई के नाम पर ७० हजार, टांड डबरी के नाम पर ७० हजार, झिलमिली तालाब की सफाई के लिए पांच लाख रुपए निकाले, लेकिन कोई कार्य नहीं किया गया।
इस दौरान एक ठेकेदार शत्रुघन निर्मलकर ने बताया कि उसने तालाब की सफाई किया है, लेकिन ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उसने मछली का जाल लगाने के लिए चिला हटाने का काम किया और इसी को सचिव सफाई बता रहा है। इसी तरह गांव के तलाब की निलामी, हैंडपंप लगाने, सहित गांव में सीसम के पेड़ की लकड़ी बेचने का आरोप भी लगाया गया। इस बारे में सरपंच सचिव गोलमोल जवाब देते नजर आए और जांच टीम ने सचिव को दोषी पाते हुए उसे फटकारा और उसी दौरान गांव की ८२ एकड़ भूमि के प्रस्ताव को भी रद्द किया। जन सुनवाई के दौरान अकलतरा सीईओ अन्वेश घृतलहरे, तहसीलदार, सूर्यकांत साय, पंचायत इंस्पेक्टर फागूराम त्रिघोष्टी और अमलीपाली पंचायत के सचिव कमल कुमार मरावी उपस्थित रहे।
पंच इतवारी यादव ने लगाए कई आरोप
ग्राम पंचायत झलमला में वार्ड नंबर आठ के पंच इतवारी यादव ने कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि सचिव ने मिलीभगत करके कोयला कारोबारियों को ४० लाख रुपए में गांव की ८२ एकड़ जमीन को बेचने के लिए गलत प्रस्ताव किया। उसने पहले तो शौचालय निर्माण के लिए पंचों से फर्जी साइन कराया और उसके बाद उसमें प्रस्ताव की जगह गांव की जमीन कृषि विज्ञान केंद्र खोले जाने के नाम पर दिए जाने का फर्जी प्रस्ताव कर दिया। पंच ने कहा यदि गांव में कृषि विज्ञान केंद्र शासन खोल रही है तो गांव का हर व्यक्ति इस प्रस्ताव साइन करने को तैयार है, लेकिन, सच यह है कि उन्हें ठगा जा रहा है।
खुद शौचालय बनाया, लेकिन नहीं मिली राशि
गांव के एक बुजुर्ग ने अपना बयान दर्ज कराते हुए बताया कि उसने अपने घर में खुद की राशि से शौचालय निर्माण कराया, लेकिन चार साल बाद भी उसे अब तक शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहन राशि नहीं दी गई है। उसने जब पता किया तो पता चला कि उसके परिवार में जिस सदस्य के नाम पर शौचालय पास हुआ उसका फर्जी अंगूठा लागकर राशि को निकाल लिया गया है, जबकि वह व्यक्ति पढ़ा लिखा था और हस्ताक्षर करता था। आज उस व्यक्ति की मौत हो गई है, लेकिन उसके बाद सरपंच सचिव मिलकर लोगों के साथ इस तरहा का भ्रष्टाचार कर रहे हैं। आरोप है कि ऐसा कई ग्रामीणों के साथ हुआ है।