
झालावाड़ जिले के भालता क्षेत्र की छापी नदी पर बने छापी बांध में इस वर्ष बारिश के पानी की आवक बहुत ही कम हुई। जिला मुख्यालय, झालरापाटन,अकलेरा, बकानी, रटलाई समेत करीब 50 गांवों की पेयजल आपूर्ति करने के अलावा नहरी तंत्र से करीब 10 हजार हैक्टेयर जमीन में सिंचाई के लिए उपयोगी छापी डेम में अभी तक केवल 30 प्रतिशत जल संचित है। जबकि पिछले साल भरपूर बरसात के चलते जबरदस्त पानी की आवक हो जाने पर 16 जुलाई 2023 को 2 गेट व 17 जुलाई 2023 को 4 गेट खोलने पड़े थे।
जल संसाधन विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार गत वर्ष जुलाई माह में छापी डेम में 75 प्रतिशत जल भराव हो गया था। जबकि इस वर्ष इसके विपरीत 70 प्रतिशत खाली पड़ा हुआ है। डेम में पानी की आवक मध्यप्रदेश में होने वाली अच्छी बरसात पर निर्भर करता है। उमरिया भालता क्षेत्र के साथ ही एमपी की नदियों से बहकर आने वाले पानी से ही बांध का जलस्तर बढ़ जाता है। जोरदार बारिश होने से पानी की आवक पर्याप्त नही होने से किसानों में मायूसी छा रही है। इस वर्ष मूसलाधार वर्षा नही होने से अभी तक छापी बांध में भराव क्षमता का महज 30 प्रतिशत जल भरा हुआ है। छापी डेम परियोजना के सहायक अभियंता युगल माहेश्वरी, कनिष्ठ अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि इस बार क्षेत्र व एमपी में मूसलाधार वर्षा नही होने से बांध अपनी भराव क्षमता पूर्ण नही कर सका। इसकी कुल भराव क्षमता 42.31 फिट है। अभी करीब 24 फिट खाली है। बांध में 82.57 मिलियन घन मीटर जल एकत्रित हो सकता है।
किसानों को मिलता है फायदा
छापी बांध में पर्याप्त मात्रा में पानी भर जाने से रबी सीजन में नहरी तंत्र द्वारा जल छोड़ा जाता है। गेहूंखेड़ी, घाटोली, अकलेरा क्षेत्र के अनेक किसानों को फायदा मिलता है। बांध लबालब हो जाने पर नहरी तंत्र के माध्यम से 9375 हैक्टेयर भूमि सिंचित होती है। विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार आगे बारिश की कमी व मानसून की बेरुखी से बांध अपनी भराव क्षमता पूर्ण नही कर पाया है। मानसून आगमन से अभी तक केवल 2 फिट जलस्तर बढ़ा है। हालांकि अभी बारिश के ढाई महीने शेष बचे हुए हैं। एमपी में अच्छी बरसात के बाद ही बांध लबालब हो सकेगा। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बांध में पानी उपलब्ध है। आवक भी जबरदस्त होती है। अभी बारिश का समय शेष है। पेयजल आपूर्ति व सिंचाई में दिक्कत नहीं होगी।