photo & video by : Manoj Sen/जोधपुर. गांधी मैदान में आयोजित 51 दिवसीय भक्तिरस महोत्सव में आठवें दिन बुधवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कथा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरने के बाद विशाल प्रोजेक्टर लगाकर श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई। भक्तिरस महोत्सव में संगीतमय नरस कथा के दौरान श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। भक्तिरस महोत्सव के तहत बुधवार से पांच दिवसीय भक्त चरित्र नानीबाई का मायरा कथा एवं मीरां चरित्र का संगीतमय आयोजन हुआ। सूरसागर बड़ा रामद्वारा के महंत रामप्रसाद व गोवत्स राधाकृष्ण के सान्निध्य में दोपहर से मधुर राजस्थानी भाषा में भक्त नरसी के स्वरूप अभिनय के साथ पहली बार विशेष प्रस्तुतिकरण हुआ। महंत रामप्रसाद ने बताया कि भक्त चरित्र की कथा में विशेष उत्सव संतों के सानिध्य में हो रहे हैं। वहीं मंगलवार को व्यासपीठ से गोवत्स राधाकृष्ण ने जगन्नाथ शयनोत्सव प्रसंग में कहा कि चातुर्मास के दिनों में व्रत नियमों का पालन करने से भगवान की कृपा भक्तों को प्राप्त होती है। उन्होंने कहा, कि पुष्प भक्तों के हृदय का स्वरूप है इसलिए पुष्पों का शृंगार भगवान को इतना प्रिय है कि जब भगवान जगन्नाथ शयन करते हैं तो चारों तरफ फू लों की सज्जा होती है। उन्होंने कहा कि जीवन में कुसंग और सत्संग का सर्वाधिक प्रभाव होता है। सत्संग का सदैव अच्छा और कुसंग का हमेशा बुरा असर होता है। कथा में गीत गोविंद की रचना करने वाले जगन्नाथ भक्त जयदेव की रचना में भगवान प्रविष्ठ होने के प्रसंग के दौरान भक्ति गीत थ्हारी चाकरी में चूक कौनी राखूं म्हारा सांवरिया.. चाकर म्हानै राखौजी .. पर उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे।