स्टोरी व वीडियो : नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. शहर की एक और विरासत सूरसागर तालाब अंतिम सांसें गिन रहा है। बाईजी का तालाब, गंगलाव तालाब, मानसागर के बाद जिला प्रशासन की लापरवाही से सूरसागर तालाब को दफन करने का कार्य अंतिम चरण में है। आधे से अधिक तालाब को मलबे और कचरा डालकर पाट दिया गया है। तालाब में खेती करने वाले खातेदारों का कहना है कि फोरलेन सडक़ निर्माण के लिए राज्य सरकार के आदेश से ठेकेदार ने ही मलबा डलवाया है। फोरलेन की योजना ठंडे बस्ते में जाने के बावजूद भी तालाब के आगोर क्षेत्र में मलबा डालने का काम अनवरत जारी है।
तालाब के ठीक सामने वनभूमि पर बे रोकटोक लगातार कब्जों के बाद भू माफिया अब तालाब को मलबे से पाटकर कब्जा करना चाहते हैं। सदियों पुराने ऐतिहासिक महत्व के तालाब का निर्मल जल कभी आस-पास लोगों की प्यास बुझाने के काम आता रहा है। वन क्षेत्र रावटी की पहाडिय़ों का पानी इसी तालाब में एकत्र होता था। इसका आगोर बड़ा होने के कारण पानी अधिक मात्रा में आता था। लेकिन रावटी की पहाडिय़ों पर अंधाधुंध कब्जों के कारण तालाब में पानी की आवक थम गई है। नगर निगम की ओर से भी कुछ साल पूर्व योजनाबद्ध तरीके इसमें चांदपोल, विद्याशाला क्षेत्र के सीवरेज का पानी डालने से दूषित होने लगा था।
न्याय के लिए हमने एनजीटी का द्वार खटखटाया
सूरसागर महल से सटे ऐतिहासिक तालाब के रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने एमओयू के तहत मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट को सौंपी है। सिर्फ अकाल के दौरान तालाब जब सूख जाते थे तो पेटा काश्त के तहत कृषकों को तालाब में खेती करने की अनुमति दी जाती थी। लेकिन वर्तमान में खेती के लिए सूरसागर तालाब के एक बड़े हिस्से को पाटा जा रहा है। हमने तालाब को लगातार मलबे से पाटता देखने के बाद जिला प्रशासन और जयपुर पुरातत्व विभाग को लिखित में शिकायत दर्ज कराई है। लेकिन कोई भी नतीजा नहीं निकलता देख हमने नेशनल ग्रीन टिब्यूनल में केस दायर कर न्याय के लिए दरवाजा खटखटाया है। तालाब में लगातार मलबे से पर्यावरण को नुकसान होने के साथ ऐतिहासिक महत्व के तालाब का वजूद खत्म हो जाएगा।
– करणीसिंह जसोल, निदेशक, मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट
तालाब के अंदर हमारी कृषि भूमि
सूरसागर तालाब में हमारी पुश्तैनी कृषि भूमि है जिस पर हम पीढिय़ों से कृषि कार्य करते आए हैं। करीब 12 खातेदार के नाम से कृषि भूमि दर्ज है। इसके अलावा तालाब के आगोर में ही शिक्षा विभाग के नाम से 24 बीघा भूमि दर्ज है। निगम अधिकारियों की ओर से चांदपोल और आसपास के क्षेत्रों के सीवरेज का पानी खुले नाले के रूप में डाला जाता है। जिससे हमारी कृषि भूमि खराब हो रही है। जिला प्रशासन को बार बार ज्ञापन के बावजूद तालाब परिसर में सीवरेज के पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं हुई है। सूरसागर बाइपास से बालसमंद तिराहे तक फोर लेन सडक़ निर्माण के टेंडर जारी होने के बाद ठेकेदार छगनीराम की ओर से वर्ष 2014-15 में खातेदारों की जमीन पर तालाब के भीतर मलबा डलवाया गया। अभी मलबा डालने का काम बंद है।
– देवेन्द्र सोलंकी, तालाब के भीतर जमीन का खातेदार
तालाब की फेक्ट फाइल
– 1595 से 1619 तक जोधपुर के शासक रहे महाराजा शूरसिंह ने करवाया सूरसागर तालाब का निर्माण।
– 8 वर्ष में तैयार हुआ था तालाब
– 2 कुएं और तीन बावडिय़ा भी है तालाब में
यह भी है न्यायालय का आदेश
अब्दुल रहमान बनाम राजस्थान सरकार के एक मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय ने नागौर में एक बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर 18 जुलाई 2003 को दिए गए निर्णय में कहा था कि नदी की भूमि किसी भी तरह के निर्माण में प्रयुक्त नहीं की जा सकती है। न्यायालय के आदेश के अन्तर्गत राज्य द्वारा विशेषज्ञ समिति की अनुशंषाओं पर विचार करने तथा जलागम क्षेत्रों को उनकी मूल स्थिति में पुन: लाने का राज्य को निर्देश दिया था।
रामजी व्यास, पर्यावरणविद्