करौली. उत्तरभारत प्रसिद्ध आस्थाधाम कैलादेवी में कैलामाता के चैत्र लक्खी मेले को शुरू होने में महज तीन दिन का समय शेष है, लेकिन अभी व्यवस्थाएं आधी-अधूरी ही बनी हुई हैं। बड़ा पांचना पुल पर स्थित जीर्ण-शीर्ण हो रही छतरी भी गिराऊ हालत में है, जिसे अब तक दुरुस्त नहीं कराया गया है।
गौरतलब है कि कैलामाता के मेले में लाखों की संख्या में सैंकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा करके श्रद्धालु पहुंचते हैं। इनमें विशेष रूप से उत्तरप्रदेश के विभिन्न शहरों आगरा, अलीगढ़ हाथरस आदि से श्रद्धालु पदयात्रा करते हुए कैलादेवी जाती हैं, जिनमें से हजारों की संख्या में श्रद्धालु करौली-हिण्डौन मार्ग स्थित बड़ा पांचना पुल पर ठहराव कर स्नान करते हैं, लेकिन इस बार अब तक घाटों पर ही समुचित सफाई की व्यवस्था नहीं हुई है। जबकि अगले दो-तीन दिनों में पदयात्रियों का आना शुरू हो जाएगा। इससे मेले में आने वाले भक्तों को परेशानी होगी। हालांकि इस बार सार्वजनिक निर्माण विभाग ने सुरक्षा की दृष्टि से घाटों के ऊपर लोहे के एंगल लगाकर चेन लगाई है। लेकिन घाटों के आसपास अभी भी मिट्टी और कचरा जमा हुआ है।
गिराऊ हालत में छतरी
बड़ा पांचना पुल रियायतकाल का बना हुआ है। निर्माण के दौरान ही सुरक्षा दीवार के बीच-बीच में छतरियों का भी निर्माण कराया गया था। चूंकि पुल पर सड़क की चौड़ाई कोई अधिक नहीं है। ऐसे में छतरियों का एक फायदा यह भी था कि पुल पर यदि आगे-पीछे से कोई वाहन आ रहा हो तो राहगीर छतरी में ठहरकर अपना बचाव कर सकता था, लेकिन जिम्मेदारों द्वारा समय पर देखभाल-मरम्मत नहीं कराने से ये छतरियां खुद ही असुरक्षित हो गई। समय पर देखरेख नहीं होने से कुछ छतरियों का तो अस्तित्व ही खत्म हो गया है, जबकि अब एक मात्र भी मरम्मत और देखरेख के अभाव में गिराऊ स्थिति में हैं।
संकरे पुल के बीच हो जाती है रेलमपेल
बड़ा पांचना पुल की चौड़ाई भी काफी कम है। एक चौपहिया वाहन के एक ओर से गुजरने के दौरान दूसरे छोर पर अन्य वाहन थम जाते हैं। सामान्य दिनों में दिनभर इस तरह के कई मौके आते हैं। हालांकि इस समस्या के समाधान के लिए मेले के दौरान पुलिस-होमगार्डस की यहां व्यवस्था रहती है। इस बार भी पांचना बड़ा पुल पर प्रशासन ने सिविल डिफेंस की टीम की तैनाती कर दी है।