करौली. जिले के सपोटरा उपखंड मुख्यालय स्थित आदिवासी मीना धर्मशाला में राजस्थान पत्रिका के मेरा शहर मेरा मुद्दा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें क्षेत्र की समस्याओं को लेकर क्षेत्र के लोगों ने विचार व्यक्त किए और इनके समाधान की जनप्रतिनिधियों से मांग की। लोगों ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का अंतिम साल चल रहा है, लेकिन कई समस्याओं का अब तक समाधान नहीं हुआ है।
चर्चा के दौरान प्रताप पाकड कोड्याई ने बताया कि सपोटरा विधानसभा क्षेत्र के करणपुर मण्डरायल क्षेत्र सहित डांग क्षेत्र के इलाके में आजादी के 73 साल गुजरने के बाद भी नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। डांग क्षेत्र की ग्राम पंचायत दौलतपुरा, निभेरा, महाराजपुरा, राहिर, अमरबाड, नरौली, सिमिर में बिजली-पानी, चिकित्सा आदि की समस्याओं से लोग त्रस्त है। लोगों ने कहा कि जनप्रतिनिधि भी समस्याओं के समाधान में उदासीनता दिखा रहे हैं। करणपुर क्षेत्र के भखूला का नाला गत कई वर्षों से विकास की बांट जोह रहा है। राजस्थान पत्रिका के मेरा शहर मेरा मुद्दा कार्यक्रम के अन्तर्गत क्षेत्र के लोगों ने नशे पर लगाम लगाने और रोडवेज बसों का संचालन करने की मांग की। कस्बे के निवासी सीताराम भूतिया ने सार्वजनिक जगहों पर सीसीटीवी लगवाने, क्षेत्र में बढ़ रहे स्मैक व शराब के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की मांग की।
रोडवेज बसों का मिले लाभ, अस्पताल में सुधरे व्यवस्थाएं
कार्यक्रम में लोगों ने रोडवेज बसों का लाभ नहीं मिलने पर भी चर्चा की। लोगों ने कहा कि सपोटरा कस्बे से जिला मुख्यालय से चलने वाली जयपुर,गंगापुर सिटी व करौली की रोडवेज बसें बंद होने से निजी वाहनों में यात्रा करनी पड़ती है। लंबे समय से रोडवेजों का संचालन करने की मांग की जा रही है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। मुकेश गुप्ता ने नगरपालिका द्वारा बनाई गई नालियों के निर्माण कार्य के दौरान जल निकासी की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जल्द ही मानसून आने को है, लेकिन अभी तक नालियों का पूर्णरूप से निर्माण नहीं हुआ है। कस्बे में जगह-जगह पर विद्युत तार झूल रहे हैं। जिनको दुरुस्त कराने की आवश्यकता है।
वहीं हनुमान गर्ग ने सपोटरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर रिक्त पदों को भरवाने, सोनोग्राफी मशीन का संचालन कराने, नलों के लीकेज को ठीक कराने की मांग की।
महाविद्यालय में भरवाएं रिक्त पद
मनकेश कानापुरा ने कहा कि महाविद्यालय के विद्यार्थियों को आवागमन के साधन नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार शिकायत के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। महाविद्यालय में अधिकतर आचार्य व सहआचार्यों के पद रिक्त होने से पढ़ाई नहीं हो पा रही है।