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करौली जिले में केवीएसएस की दवा दुकानें इसलिए करोड़ों की उधारी में दबीं

करौली. राज्य सरकार की ओर से कर्मचारियों-पेंशनर्स को आरजीएचएस के तहत सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से क्रय-विक्रय सहकारी समिति की ओर से सरकारी अस्पतालों में संचालित की जा रही दवा दुकानें आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही हैं।

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करौली. राज्य सरकार की ओर से कर्मचारियों-पेंशनर्स को आरजीएचएस के तहत सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से क्रय-विक्रय सहकारी समिति की ओर से सरकारी अस्पतालों में संचालित की जा रही दवा दुकानें आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही हैं। माह दर माह गुजरने के बाद भी केवीएसएस को दवाओं का भुगतान नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते दवा दुकानों का संचालन मुश्किलभरा हो गया है। स्थिति यह है केवीएसएस की इन दवा दुकानों पर पर्याप्त दवा तक उपलब्ध नहीं हैं।

असल में इन दवा दुकानों का सवा 4 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान अटका पड़ा है। ऐसे में केवीएसएस जिन दवा फर्मों से दवा की आपूर्ति कराती है, उनकी भी केवीएसएस पर उधारी बढ़ गई है, जिससे उन दवा फर्म विक्रेताओं ने अब उधार में दवा देने से हाथ पीछे खींच लिए हैं। नतीजतन दवा दुकानों पर पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता में दाम (बजट) रोड़ा बना हुआ है और पेंशनर्स-कर्मचारियों को इन दुकानों से समुचित दवा नहीं मिल पा रही हैं।

करौली में यूं बढ़ी राशि
अक्टूबर 2021 से करौली सामान्य चिकित्सालय में केवीएसएस की ओर से आरजीएचएस कार्डधारियों (राज्य कर्मचारी-पेंशनर्स) को दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार नवम्बर 2021 से जून 2023 तक केवीएसएस दवा दुकान से एक करोड़ 82 लाख रुपए से अधिक की दवाओं की खपत हुई, जिसमें से करीब एक करोड़ 25 लाख रुपए का भुगतान हो गया। शेष बकाया हो गया। इसके बाद जुलाई और अगस्त माह की भी राशि बकाया है।

छह माह में 3 बार मिला भुगतान
सरकार से दवाओं की खरीद और खपत की तुलना में आधे से कम राशि का भुगतान मिल रहा है। हिण्डौन क्रय-विक्रय सहकारी समिति की दवा की दुकान को एक अप्रेल से अब तक साढ़े पांच माह में तीन बार में 68 लाख रुपए का भुगतान मिला है। जबकि इस अवधि में 1 करोड़ 28 लाख 24 हजार रुपए की दवाएं आरजीएचएस लाभार्थियों को दी गई है। सूत्रों के अनुसार दवा की दुकान पर 31 मार्च को 1 करोड़ 63 लाख 68 हजार तथा पेंशनर्स के पुराना बकाया की 28 लाख 84 हजार रुपए की देनदारी थी। जो बढ$कर 2 करोड़ 54 लाख हो गई है।

दवा की दुकानों के बकाया भुगतान का यह है गणित
केवीएसएस की ओर से करौली जिला मुख्यालय सहित हिण्डौनसिटी, टोडाभीम और नादौती में एक-एक दवा दुकानों का संचालन किया जा रहा है। केवीएसएस सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा आरजीएचएस योजना लागू करने के बाद केवीएसएस की दवा दुकानों और अन्य मेडिकल स्टोर्स के लिए अधिकृत किया गया था। अक्टूबर 2021 से केवीएसएस की ओर से आरजीएचएस कार्डधारियों (राज्य कर्मचारी-पेंशनर्स) को दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में हिण्डौनसिटी में संचालित केवीएसएस की दवा दुकान के सर्वाधिक करीब 2 करोड़ 54 लाख रुपए की राशि का भुगतान बताया है, जबकि करौली में बकाया भुगतान की यह राशि करीब 80 लाख रुपए है, जबकि टोडाभीम में केवीएसएस को करीब 72 लाख रुपए का भुगतान अटका पड़ा है। वहीं नादौती में 25 लाख रुपए की राशि का भुगतान नहीं हुआ है। सूत्र बताते हैं कि जब से योजना शुरू हुई है, तभी से कभी भी केवीएसएस को पूरा भुगतान नहीं हुआ। बीच-बीच में कुछ राशि सरकार की ओर से केवीएसएस को दी जाती रही, जिससे बकाया बढ़ता गया।

होलसेलर फर्मों ने किए हाथ खड़े
सूत्रों के अनुसार समय पर भुगतान नहीं मिल पाने से केवीएसएस की ओर से होलसेलर फर्मों से दवाएं उधार लेनी पड़ रही हैं, लेकिन लम्बे समय तक होलसेलर फर्मों को भी भुगतान नहीं हो पाने से अब स्टॉकिस्ट द्वारा भी पर्याप्त मात्रा में दवाओं की आपूर्ति करने में हाथ खड़े किए जा रहे हैं। इसके चलते क्रय विक्रय सहकारी समिति की दवा दुकान पर पर्याप्त दवा भी नहीं मिल पा रही हैं। गौरतलब है कि राज्य कर्मचारियों, पेंशनर्स को आरजीएचएस के जरिए दवा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने केवीएसएस सहित निजी दवा दुकानों को अनुबंधित किया हुआ है।

इनका कहना है
आरजीएचएस लागू होने के बाद दवाओं की खरीद का भुगतान कॉनफेड के जरिए होता है। करोड़ों रुपए की देनदारी होने से सहकारी संस्थाएं आर्थिक बोझ से दबी हैं। जल्द भुगतान के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।
अवतारसिंह मीणा, उपपंजीयक सहकारी समितियां करौली