राघवेंद्र चतुर्वेदी @ कटनी. समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया में कटनी उन चुनिंदा जिलों में शामिल है, जहां खरीदी केंद्रों तक बारदाना पहुंचाने के लिए टेंडर निकालने के बाद भी नागरिक आपूर्ति निगम (नान) को ठेकेदार नहीं मिले। यहां 102 खरीदी केंद्रों में बारदाना की आपूर्ति जुगाड़ व्यवस्था पर निर्भर है और इसका नुकसान यह है कि आए दिन कई केंद्रों में बारदाना की कमीं के कारण धान की खरीदी ठप पड़ जाती है। इतना ही नहीं केंद्र में किसानों की धान की तुलाई हो भी गई तो धान लेकर गोदाम पहुंचने पहुंचने वाले ट्रकों से धान खाली करवाने की व्यवस्था भी ठेके पर है। यहां ठेकेदार समय पर ट्रक से धान खाली नहीं करवा पाते हैं और फेरे लगाने में विलंब के कारण धान का उठाव नहीं होने से केंद्र में खरीदी रुक जाती है। जानकर ताज्जुब होगा कि ये छोटी-छोटी समस्याएं बीते कई सालों से चली आ रही है। इन समस्याओं के कारण किसानों को हर साल धान बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। किसान समस्या लेकर कई बार अफसरों के सामने गुहार तो लगाते हैं, लेकिन उनकी समस्या दूर नहीं हो पा रही है।
ऐसे समझें किसानों की परेशानी – बुधवार को जिले के 18 केंद्रों में बारदाना नहीं होने से किसानों से धान खरीदी पर असर पड़ा, कई केंद्रों से किसान मायूस लौटे। इसमें सलैया कोहारी, कांटी, सिनगौड़ी, बड़वारा, पिलौंजी, हदरहटा, करेला, गुरजी, रीठी, कौडिय़ा, केवलारी, उबरा, हथियागढ़, धरवारा, कुआं, बचैया, खमतरा व कूड़ा सहित अन्य केंद्र शामिल रहे।
धान लोड ट्रक खाली करवाने में ठेकेदार की मनमानी – समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बाद धान ट्रक में लोड कर वेयर हाउस पहुंचती है, तो वहां खाली करवाने से लेकर दूसरी व्यवस्था का काम ठेका कंपनी गोग्रीन के पास है। यहां ठेका कंपनी के कई बार समय पर ट्रक खाली करवा पाने में असफल हो जाने से केंद्र से धान उठाव पर असर पड़ता है और किसानों से धान खरीदी बंद हो जाती है।
गुणवत्ता परखने की व्यवस्था भी काम चलाऊ – जिले के अधिकांश धान खरीदी केंद्रों में गुणवत्ता परखने के पंखा और छन्ना की व्यवस्था काम चलाऊ है। ऐसे में धान की तुलाई हो जाने के बाद गोदाम में सर्वेयर द्वारा धान की गुणवत्ता फेल कर दिए जाने के कारण वापस किसानों की परेशानी बढ़ जाती है। तीन जनवरी को ऐसा ही मामला बहोरीबंद गोदाम में सामने आया जब बड़ी मात्रा में गोदाम में धान फेल करने पर हड़कंप मच गया।
लापरवाही पर कार्रवाई में निभाई जाती है औपचारिकता – 28 दिसंबर को बारिश के बाद जिले के कई केंद्रों में हजारों क्विंटल धान खराब हो गई। 29 दिसंबर को कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, जिला पंचायत सीइओ जगदीश चंद्र गोमे और एसडीएम सहित अन्य अधिकारी जायजा लेने केंद्र पहुंचे। लापरवाही पर नान प्रबंधक मधुर खर्द, सहकारिता अधिकारी राजयश कुरील, मध्यप्रदेश वेयरहाउस प्रबंधक चंद्रशेखर नरवरे और ट्रांसपोर्टर मेसर्स राहुल सलुजा व मेसर्स जयश्रीराम ट्रांसपोर्ट को नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा गया। इसमें जवाब की अवधि पूरी हो जाने के बाद भी जवाब नहीं आने में लापरवाही पर जवाबदेही तय नहीं हुई।
ये भी जानें
– बड़वारा में बुधवार को गोदाम पहुंच मार्ग पर पुलिस ने नो-इंट्री के कारण धान लोड ट्रकों की आवाजाही रोक दी, जानकारी अधिकारियों तक पहुंची और किसी तरह रास्ता खुलवाने की कोशिश हुई। दिन में गोदाम तक ट्रक नहीं पहुंची तो रात में धान खाली नहीं हो पाएगी और इसका असर भी खरीदी केंद्र में किसानों से धान तुलाई पर पड़ेगा।
– धान खरीदी कर रहे ज्यादातर केंद्रों में तिरपाल की कमीं होती है। बारिश के समय धान को सुरक्षित नहीं रख पाने के कारण हजारों क्विंटल बारिश में भीग जाती है। कई केंद्रों में छन्ना पंखा चालू हालत में नहीं है। दिखाने के लिए रखे गए हैं। इसका असर ग्रेडिंग पर पड़ता है और गोदाम में धान फेल होने से किसान को दोबारा प्रक्रिया से गुजरनी पड़ती है।
– नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के जिला प्रबंधक मधुर खर्द बताते हैं कि बारदाना पहुंचाने की व्यवस्था में सुधार कर रहे हैं। टेंडर में ठेकेदार नहीं मिलने के कारण किसी तरह व्यवस्था बनाई जा रही है।
– जिला पंचायत सीइओ जगदीश चंद्र गोमे बताते हैं कि 28 दिसंबर की बारिश में धान खराब होने मामले में नोटिस जारी करने के बाद अब तक जवाब नहीं आया है। जानकारी कलेक्टर को देंगे। निर्देश मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
– 50 हजार 9 पंजीकृत किसान.
– 27 हजार 878 ने बेची धान.
– 2 लाख 31 हजार 322 मिट्रिक टन खरीदी.
– 1 लाख 65 हजार 736 मिट्रिक टन परिवहन.
– 65 हजार 586 मिट्रिक टन धान उठाव के लिए शेष.
– 449 करोड़ रूपए होना किसानों को भुगतान.
– 166.30 करोड़ रूपए ही भुगतान, शेष राशि 282 करोड़.