ऐसे रखा डिजिटल अरेस्ट
18 जुलाई को पंधाना के बर्तन व्यवसायी रामाधार वर्मा को एक फोन आया। सायबर अपराधियों ने व्यवसायी को धमकाते हुए कहा कि उनकी सिम से अवैध गतिविधियां की गई हैं, यहां तक कि हत्या के मामले में भी उनके नंबर का इस्तेमाल हुआ है। आरोपियों ने खुद को पुलिस और क्राइम ब्रांच जैसी एजेंसियों का अधिकारी बताकर उन्हें भरोसे में लिया और किसी से भी बात नहीं करने दी। आरोपियों ने कहा कि उनकी कॉल्स और मोबाइल सिम ट्रैक की जा रही हैं, इसलिए फोन का इस्तेमाल बंद कर दें। अगर सहयोग नहीं किया तो गिरफ्तारी हो सकती है।
8 एफडी तुडवाई, बैंक में बताया जमीन खरीदना है
बर्तन व्यवसायी से कहा तुम्हारे पास कितने रुपए हैं। व्यवसायी ने बताया कि उसके पास 30 लाख रुपए है। यह रुपए बैंक से बदमाशों ने अपने खाते में आरटीजीएस करवा दिए। इतने पर भी बदमाश नहीं माने कहा कि तुम्हारे पास ओर भी रुपए हैं हमें सब मालूम हैं तब व्यवसायी ने अपनी एफडीओ के बारे में बताया। उनसे 8 एफडी तुड़वाकर 20 लाख रुपए निकलवाए, जिसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा दिए। व्यवसायी ने बैंक में एफडी तुडवाने की वजह जमीन खरीदना बताई। इस तरह से 50 लाख रुपए लेने के बाद अंत में जमानत के नाम पर 70 हजार रुपये लिए। इस तरह से अपराधियों ने पीड़ित को पूरी तरह खाली हाथ कर दिया। आखरी में कहा अब फोन मत करना हमारे चार पुलिसकर्मियों की हत्या हो गई है।
डीसीपी से कराई नकली बात
सायबर ठगों ने बुजुर्ग व्यवसायी को विश्वास दिलाने के लिए नकली अधिकारियों से बात भी कराई। क्राइम ब्रांच के डीसीपी से बात करवाई। डीसीपी ने कहा कि मामला गंभीर है और यदि पैसे जमा नहीं कराए तो जेल जाना पड़ेगा। वीडियो काल कर थाने में कार्रवाई करते हुए पुलिसकर्मी दिखाए।
एक माह बाद खुला राज
करीब एक माह तक दंपति को लगा कि वे किसी कानूनी कार्रवाई से बच रहे हैं। लेकिन जब असलियत सामने आई तो उनके होश उड़ गए। रिश्तेदार को पता चला तो उन्होंने दंपति के साथ जाकर तुरंत पंधाना थाना और सायबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। ऑनलाइन पोर्टल पर भी की।
पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय ने बताया कि शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। जिन खातों में रुपए डाले गए थे वे सभी खाली हो चुके हैं। उसमें एक भी रुपए नहीं हैं। किसी ओर खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। लोगों से अपील की है कि ऐसे कॉल आने पर डरे नहीं। न किसी अजनबी को बैंकिंग जानकारी दें और न ही धनराशि ट्रांसफर करें। किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत शिकायत 1930 (राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर) या अपने नजदीकी थाने में करें।