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न कोई बोर्ड या संकेतक, निर्माणाधीन फ्लायओवर से 50 फीट नीचे गिरी बाइक, दो चचेरे भाई गंभीर घायल

पुलिस लाइन के सामने निर्माणाधीन तीन पुलिया फ्लाय ओवर पर एक बड़ा हादसा हो गया। संकेतक और स्टॉपर नहीं होने के कारण बाइक सवार दो चचेरे भाई अधूरे ब्रिज को चालू समझकर उस पर चढ़ गए और करीब 50 फीट नीचे जा गिरे। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें एक की हालत नाजुक बनी हुई है। वहीं इस हादसे में परिवार के अन्य लोग भी बच गए, जो उनके पीछे बाइक से आ रहे थे। वे बाइक गिरने की आवाज सुन रुक गए थे। हादसे में सेतु निगम के इंजीनियर और ठेकेदार की लापरवाही सामने आई है।

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मंगलवार शाम करीब पांच बजे की घटना हैं। निर्माणाधीन ब्रिज से बाइक गिरने की आवाज सुनकर लोग नीचे पहुंचे तो देखा दो लोग तड़प रहे थे। उनकी बाइक पुरी तरह से टूट फूट गई। इस दौरान ने पीछे बाइक से आ रहे परिवार के लोग भी घटनास्थल पहुंचे। इस बीच सूचना मिलने पर कोतवाली थाने से एसआइ मनोज दवे भी घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने लोगों की मदद से घायल कमल और बलवंत को जिला अस्पताल पहुंचाया।

नहीं था कोई बोर्ड, चालू समझकर पुल पर बाइक ले गए


जिला अस्पताल में भर्ती पिपरखेड़ नाका निवासी कमल पिता मोहन डावर (40) का कहना है कि वह और उसका चचेरा भाई बलवंत सिंह पिता सवन डावर (30) बाइक से खार-खालवा के पास सिरपुर गांव रिश्तेदार के घर कार्यक्रम में गए थे। साथ में परिवार के अन्य लोग थे जो तीन बाइक से पीछे आ रहे थे। भीड़ से बचने के लिए बाइक तीन पुलिया ओवर ब्रिज पर डाल दी। हमें पता नहीं था कि ब्रिज अभी बना नहीं है। ब्रिज के क्षोर पर किसी तरह का बोर्ड या स्टापर भी नहीं लगाया गया था। इससे सीधे ब्रिज पर बाइक से जा रहे थे, तभी अचानक देखा की सामने से पुल गायब है। जिसके बाद वे सीधे नीचे गिर गए।

बाइक गिरने की आवाज सुनकर रूक गए


भाभी रुखमा डावर ने बताया कि हम सभी परिवार के लोग तीन अलग-अलग बाइक पर थे। हमारे आगे जेठ कमल और देवर बलवंत एक बाइक पर चल रहे थे। पुलिस पेट्रोल पंप के सामने से बाइक सीधे पुल पर चढ़ा दी। हम उनसे करीब 50 फीट दूरी पर चल रहे थे, तभी बाइक गिरने की आवाज आने पर पति ने बाइक रोक दी, नहीं तो हम भी बाइक सहित नीचे गिर जाते। देवर बलवंत और जेठ कमल घायल हुए हैं। जिसमें देवर बलवंत की हालत गंभीर बनी हुई है।

इंजीनियर व ठेकेदार की लापरवाही से जान पर बनी

पुलिस लाइन के सामने पेट्रोल पंप के पास से ब्रिज पर जाने का मार्ग है। यहां किसी तरह का बोर्ड या संकेतक नहीं लगे हुए थे, न ही स्टापर लगाकर रास्ता बंद किया गया था। जिससे की लोगों को ब्रिज की वास्तविक िस्थति व चल रहे निर्माण कार्य के बारे में पता चल सके। रास्ता खुला होने से बाइक सवार सीधे ब्रिज को चालू मानकर चले गए और यह हादसा हो गया। वहीं रात में यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। इस घटना को लेकर ठेकेदार और ब्रिज निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार व सेतु निगम के इंजीनियर पर भी कार्रवाई की मांग उठी है।