
कोलकाता . दुर्गा पूजा उत्सव के दिन बितते ही रविवार को महानगर की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। बसों की संख्या भी काफी कम थी। वहीं जिन रास्तों पर 48 घंटे पहले पैर रखने की जगह नहीं थी, वह रविवार को खुले मैदान की तरह दिख रहा था। रोशनी से सराबोर महानगर में हर कहीं से गीत-संगीत के स्वर हवा से बहते हुए कानों तक पहुंच रहे थे, उन्हीं मार्गों पर रविवार को लोगों की संख्या अंगुलियों पर गिनने भर थी। पूरा माहौल बन्द जैसा रहा। उल्टाडांगा, वीआईपी रोड से लेकर धर्मतल्ला, सेंट्रल एवेन्यू, गिरीशपार्क, भवानीपुर, बेहला आदि इलाकों के रास्ते सोए-सोए से दिखे, मानों लम्बी थकावट के बाद आराम कर रहे हैं। गत सप्ताह महानगर दुर्गापूजा के माहौल से रंगा हुआ था। शुक्रवार से ही विसर्जन आरम्भ हो गया है। रविवार देर शाम से लेकर रात तक कुछ विसर्जन हुए। इससे पहलेल बाहर का माहौल पूरा बन्द जैसे था। न दुकानें खुली, न बसें चलीं, न लोग दिखे और न ही किसी प्रकार की हलचल शहर में दिखी। खाने-पीने के स्टाल भी बन्द थे। कुछ रेस्तारां व एक्के-दुक्के होटल जरूर खुले थे। लेकिन ज्यादातर दुकानों के शटर बंद थे। शाम होने पर कुछ लोग दिखे भी तो मॉल में। यह सब देखने पर लगा जैसे बिन बुलाए बन्द का पालन हो रहा है। सोमवार से कोलकाता अपने चिरपरिचित अंदाज में पुन: दिखने लगेगा।