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पितृपक्ष शुरू: पितृ नाराज ना हो जाएं, ऐसे करें श्राद्ध कर्म, देखें वीडियो
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पितृपक्ष शुरू: पितृ नाराज ना हो जाएं, ऐसे करें श्राद्ध कर्म, देखें वीडियो

पितृपक्ष आरंभ हो चुका है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दिनों का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ नाराज हो जाएं तो घर का विकास थम जाता है। इसलिए इस दौरान श्राद्ध कर्म करना चाहिए। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित नवग्रह मंदिर के पुजारी ध्रुव उपाध्याय ने पत्रिका से विशेष बातचीत में बताया कि पितृपक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है।

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पितृपक्ष आरंभ हो चुका है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दिनों का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ नाराज हो जाएं तो घर का विकास थम जाता है। इसलिए इस दौरान श्राद्ध कर्म करना चाहिए। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित नवग्रह मंदिर के पुजारी ध्रुव उपाध्याय ने पत्रिका से विशेष बातचीत में बताया कि पितृपक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। इस दौरान पितरों का पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर सर्वपितृ अमावस्या तक पितृपक्ष होता है।
उन्होंने बताया कि तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करना चाहिए। गुरुवार के दिन पितृपक्ष का दूसरा दिन या द्वितीया श्राद्ध तिथि रहेगी। इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन किसी भी महीने की द्वितीया तिथि को हुआ हो। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस दिन शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की द्वितीया तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है। एक बर्तन में जल, फूल, तिल, दूध लेकर कुश और काले तिल से तीन बार तर्पण करें। इसके बाद ब्राह्मण को कपड़े, मिठाई आदि दान करें। पुत्र, पौत्र, भांजा कोई भी श्राद्ध कर्म कर सकता है। जिसके घर में पुरूष नहीं है। ऐसे में दामाद भी श्राद्ध कर्म कर सकता है।