Indra Market kota: कोटा. समय के साथ शहर का विस्तार हुआ और हर इलाके में जरूरत के बाजार विकसित हो गए, लेकिन शहर के बीच सब्जीमंडी क्षेत्र में इन्द्रा मार्केट का क्रेज आज भी वही है। बाजार करीब 60 वर्ष पुराने इस बाजार में बच्चे व महिलाओं की हर मांग पूरी हो जाती है। परिधान से लेकर सौन्दर्य प्रसाधन, और रसोई घर ड्राइंग रूम तक हर मांग यहां पूरी हो जाती है। महिलाओं व बच्चों के लिए खास अवसर पर खरीदारी इन्द्रा मार्केट के बिना अधूरी है। कभी गरमा-गर्म सेव से महकता था।
गली के सेव का स्वाद दूर तक जुबां पर चढ़ता था, अब खरीदारी के रूप में हाड़ौती के साथ दिल्ली तक बाजार की पहचान हैं। दिल्ली के लोग भी यहां से सामान खरीदकर ले जाते हैं। यहां से खरीदे गए परिधान तोहफे के रूप में दूर तक भेजे जाते हैं।
400 के करीब दुकानें: तंग गली, भीड़ बड़ी
गंधीजी की पुल से सब्जीमंडी के समानांतर करीब एक किलोमीटर लंबा सकरा बाजार है। इसमें करीब 400के करीब दुकानें हैं। महिला व बच्चों के कपड़ों के साथ रेडीमेड, आर्टिफिशयल ज्वैलरी, स्वर्ण आभूषण,सौन्द्र्य प्रसाधन, चूड़ी कंगन, चप्पल, जूते, दर्जी, कशीदाकारी समेत अन्य कई तरह की दुकानें हैं। इससे महिला व बच्चों की अधिकतर खरीदारी यहां हो जाती है। पुरुषों के परिधान भी बाजार में मिल जाते हैं। विक्रेताओं की मानें तो सुबह से रात तक करीब 5 से 6 हजार लोग बाजार में खरीदारी करने के लिए आते हैं। हर माह करीब अनुमान के तौर पर हर दिन करीब 2 करोड़ का कारोबार होता है।
सदभाव का बाजार
आधुनिक चमक-दमक से दूर परम्परागत खारीदारी के लिए खास बाजार होने से ग्राहकों में विश्वास है। दूर तक शहर बस गया व पुराने ग्राहक आज भी यहां आते हैं। होली, दिवाली, रक्षाबंधन करवा चौथ, ईद, शादीब्याह सभी अवसर पर ग्राहरों का रूझान रहता है। विक्रताओं की तरह ग्राहक भी स्थाई हैं।
दीपावली की खरीदारी का जोर
शहर में दीपावली व आने वाले सावों की खरीदारी का जोर है। इस दिनों बाजार में काफी व्यस्त है। दीपावली पर कपड़े, चूड़ी, कंगन, साज सज्जा के सामनों की खरीदारी के साथ घर गृहस्थी की जरूरत की खरीदारी भी चल रही है। महिलाओं व बच्चों में खरीदारी को लेकर खासा उत्साह नजर आ रहा है। नए-पुराने कोटा के बाजारों में खासी रोनक देखी जा रही है विभिन्न क्षेत्रों से लोग यहां खरीदारी को आ रहा है। इन्द्रा मार्केट में पैर रखने की जगह नहीं है। वर्ष भर ग्राहकों का मेला रहता है,लेकिन दीपावली व सावे के दिनों में पैर रखने की जगह नहीं मिलती। लोग परम्परागत खरीदारी के लिए यहां आते हैं।
पार्किंग व शौचालय की समस्या
क्षेत्र के दुकानदारों व आने वाले ग्राहकों के अनुसार बाजार में आने वाले लोगों को पार्किंग के अभाव में परेशान होना पड़ता है।तंग बाजार होने से दो पहिया वाहन भी यहां नहीं आ सकते। चौपहिया वाहनों की पार्किंग की भी व्यवस्था नहीं है। इन्द्रा मार्केट के प्रारंभ में अतिक्रमण की काफी समस्या रहती है। इससे कई लोग चाहकर भी यहां नही आते। दुकानदार इससे चिंतित हैं। टॉयलेट्स की भी समस्या है। बाजार में लोगों नं बताया कि प्रशासन इन समस्याओं का समाधान करे तो सोने पे सुहागा हो जाए।
कहलाती थी सेव वाले की गली
इन्द्रा मार्केट पहले कढ़ाहों में तलते सेव से महकता था। हाड़ौती भर तक यहां के सेव का स्वाद जाता था। विकास भवन के सामने की गली को तो लोग सेव वालों की गली कहते थे। इतिहासविद फिरोज अहमद बताते हैं कि समय के साथ बदलाव आया। साठ के दशक के मध्य बाजार में नयापन आया और नई तरह की दुकानें खुलने लगी। धीरे धीरे बाजार विकसित होता चला गया। बाजार की चलती देख कई मकान मालिकों ने भी दुकानें बनवा ली।
उस समय इन्दिरा गांधी प्रधान मंत्री तो नहीं बनी थी, लकिन संभव है उन्हीं के नाम से बाजार को यह नाम मिला हो। बृजराजपुरा से लेकर सब्जीमंडी के कौने तक सघन बस्ती में पहले इतनी दुकानें नहीं थी, अब तो इन्दिरा मार्केट क्षेत्र की गलियों से होता हुआ विस्तृत हो गया है। अब भले ही आधुनिकता लिए नए बाजार बन गए हों, लेकिन इस बाजार में अब भी वही भीड़ रहती है।
इनका है कहना
दुकानदार पंकज शर्मा बताते हैं कि इन्द्रा मार्केट के प्रति लोगों का विश्वास है। हाड़ौती के विभिन्न क्षेत्रों से लोग आते हैं। यहां महिला व बच्चों के लिए हर पसंद की चीज मिलेगी। हर वर्ग के ग्राहक यहां आते हैं।उत्तम चंद राजानी बताते हैं कि हमारी दुकान को 22 वर्ष से अधिक हो गए। बाजार से हाड़ौती के साथ दिल्ली समेत अन्य जगहों पर भी माल गया है। पुराना बाजार होने से स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले काफी लोग आते हैं।
इसी बाजार से करती हूं खरीदारी
नीता शर्मा बताती है कि मैंत अक्सर इसी बाजार से खरीदारी करती हूूं। महिला व बच्चों की खरीदारी के लिए मैं तो इसे श्रेष्ठ बाजार मानती हूं। हर रेंज में जरूरत की चीजें यहां मिल जाती है। वर्षों पुरानी दुकानें होने से विश्वास भी अच्छा जमा हुआ है। पार्किंग समेत कुछ समस्याओं का समाधान होना चाहिए।