कोटा. आयकर विभाग ने आयकर चोरी करने वाले करदाताओं को सचेत करने के लिए केन्द्रीय राजस्व भवन के मुख्य गेट पर ही डिस्प्ले बोर्ड लगा रखा है, इसमें लिखा है कि ‘कम्प्यूटर सब देख रहा है। लेकिन, आयकर अफसरों के लिए दलाली करने वाला दलाल इसको नहीं देख रहा था। बेखौफ होकर रिश्वत वसूल कर रहा था। एसीबी की जांच में दलाल वीरेन्द्र जैन से पूछताछ में कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। पूछताछ के बाद एसीबी ने जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। एसीबी दलाल जैन के सम्पर्क के तार जोडऩे में लगी है।
वहीं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के हत्थे चढ़े income tax Commissioner अमरीश बेदी के दलाल वीरेंद्र कुमार जैन को शुक्रवार को court में पेश किया गया जहां से उसे तीन जुलाई तक जेल भेज दिया गया। वहीं इनकम टैक्स कमिशनर अमरीश बेदी भूमिगत हो गए पुलिस उनकी तलाश में जुटी है । Broker द्वारा कमिशनर अमरीश बेदी का नाम लिए जाने के बाद उन पर मुकदमा (court case) कर मामले में अनुसन्धान किया जाएगा ।
गुरुवार दोपहर को बड़ी कार्रवाई करते हुए Income Tax Office पर छापा मार इनकम टैक्स कमिशनर अमरीश बेदी के दलाल को 50 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था । रिश्वत की राशि चेक के रूप में थी। जिसे एसीबी अधिकारियों ने बरामद कर ली है। कमिशनर अमरीश बेदी ने दलाल के जरिए परिवादी से जमीन बेचान के मामले में फैसला परिवादी के पक्ष में करने की एवज में 2 लाख रुपए मांगे थे।
जिसकी पहली किस्त के रूप में परिवादी भरत कुमार कुश्वाह ने 50 हजार रुपए का चेक कमिशनर के दलाल वीरेंद्र कुमार जैन को दिए। इसी बीच एसीबी ने दलाल वीरेंद्र को रिश्वत का चेक लेते रंगे हाथ दबौच लिया। हालांकि कमिशनर बेदी छुट्टी पर होने के कारण एसीबी के हाथ नहीं लगा। ACB kota सिटी ने जमीन बेचान से मिली रकम पर आयकर विभाग द्वारा 57.75 लाख रुपए की रिकवरी निकालने व आयकर आयुक्त (अपील) द्वारा इसके सेटलमेंट के लिए दलाल के जरिए 50 हजार रुपए का चेक लेने के मामले में दलाल को Arrested कर लिया।
एसीबी ने इस मामले में आयुक्त को आरोपी बनाते हुए उनकी गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं। एसीबी कोटा के एसपी सुधीर चौधरी ने बताया कि परिवादी धाकडख़ेड़ी निवासी भरत कुमार कुशवाह (36) ने बताया कि उसकी मां आबदाबाई ने वर्ष 2015 में उसके खाते की जमीन बेची थी, जिसकी स्क्रूटनी प्रोसेस Income tax department में चल रही थी। विभाग ने टैक्स देनदारी करीब 57.75 लाख रुपए निकाली।
भरत कुमार ने इस मामले में आयकर आयुक्त (अपील) अमरीश बेदी के समक्ष अपील पेश की। इस मामले में फैसला परिवादी के पक्ष में करने के लिए अपील अधिकारी अमरीश बेदी ने 5 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की। बाद में इनकम टैक्स प्रेक्टिसनर वीरेन्द्र कुमार जैन के जरिए 2 लाख रुपए की मांग करने लगा और सौदा एक लाख रुपए में तय हुआ। परिवादी की शिकायत पर एसीबी ने शिकायत का सत्यापन (Verification ) कराया, जिसमें रिश्वत की मांग की पुष्टि हो गई।