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घर में मिली मोहब्बत देख रो पड़ा कैथूनीपोल से निकलकर इंडियन पॉलिटिक्स के सेंट्रल पोल तक पहुंचा कोटा का बेटा

Kota News, Kota Hindi News, kota Welcomed to Speaker Om Birla: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का काफिला जैसे ही कैथूनीपोल के कूंचे तक पहुंचा... गलियों, घरों, मुंडेर और छतों पर जमे सैकड़ों लोगों का काफिला रोमांचित हो उठा.

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कोटा

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Zuber Khan

Jul 07, 2019

कोटा. 20 किमी का रास्ता… 11 घंटे में तय हुआ… कदम कदम पर पलक पावड़े बिछाए बैठी जनता जनार्दन… कैथूनीपोल की गलियों से भारतीय राजनीति के सेंट्रल पोल तक पहुंचे अपने लाडले बेटे को एक पल निहारने के लिए आधी रात में भी अकल्पनीय उत्साह से लबरेज थी… लोकसभा अध्यक्ष का काफिला जिस गली और दरवाजे से गुजरा लोग हाथों में फूल और मालाएं लिए सत्कार को दौड़ पड़े… हर कोई इस पल को अविस्मरणीय बना देने को आतुर था… अतुलनीय क्षण था जनता और उनके चहेते प्रतिनिधि के पहले दीदार का… जिसे कोटा का हर खास ओ आम अतुलनीय बनाने को आतुर हो उठा था।

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बडग़ांव से लेकर शहर की गलियों से होते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का काफिला जैसे ही कैथूनीपोल के कूंचे तक पहुंचा… गलियों, घरों, मुंडेर और छतों पर जमे सैकड़ों लोगों का काफिला रोमांचित हो उठा… हर कोई उस पल को याद कर भाव-विभोर था कि उनके मोहल्ले में पला, बढ़ा लड़का… सियासत की रपटीली राहों पर ऐसे बलखाते और इठलाते चला कि भारतीय राजनीति के सेंट्रल पोल तक जा पहुंचा… खचाखच भरी कैथूनीपोल की गलियां पार्लियामेंट के सेंट्रल पोल बन चुके लोकसभा अध्यक्ष के अभिनन्दन को आतुर हो उठीं…।

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काफिले को बीच में रोक स्पीकर भी उस दहलीज को नमन करने उतर पड़े… जिसने उन्हें लोकतंत्र की सबसे बड़ी दहलीज की रवायतों की रखवाली का जिम्मा सौंपा था… जन्म स्थली पर कदम रखते ही पूरा घर कौतुहल से भर उठा… आरती लाओ… दीपक जलाओ… बताशे घोलो…मुंह मीठा कराओ… कोई प्रसादी तो बांटो… मानो कैथूनीपोल के हर आंगन में बज उठी थी बांसुरी श्रीकृष्ण ओम की… घर की महिलाओं का उल्लास और सत्कार भाव सातवें आसमान पर था… हर कोई क्षण भर के लिए लिपट जाने को आतुर हो उठा… स्पीकर दहलीज में दाखिल हुए… पिता के चरणों में शीश नवाया… मां को दंडवत किया और छोटों को आशीष दे बढ़ चले आगे के सफर पर… आशीष, सत्कार और स्वागत का यह सिलसिला भोर तक चलता ही रहा।

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तस्वीरें

कहां से लाऊं वो शब्दकोश
हजारों लोगों की भीड़ के बीच मीडिया कर्मियों ने भी उनके चंद लम्हे चुरा मन की बात सुननी जाननी चाही… दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का स्पीकर नहीं… कोटा बूंदी का सांसद नहीं… जनता का लाडला ओम कृष्ण बिरला मुखातिब हुआ उनसे… गला रुंध चुका था… आंखें डबडबाने लगी… और तमाम कोशिशों के बाद निकले दो शब्द… वंदन कोटा…। स्पीकर की नम्रता की गूंज ऐसी थी कि कुछ देर तक पूरे कमरे में सन्नाटा पसर गया… जिसे चीरते हुए वह फिर बोले… कहां से लाऊं शब्द आपके आभार के लिए… आपके स्नेह और प्रेम के लिए… कोटा और बूंदी की जनता ने महज सांसद के तौर पर एक जनप्रतिनिधि नहीं चुना… बल्कि देश भर के जनप्रतिनिधियों का नेतृत्व करने का मौका दिया है… इस अतुलनीय जिम्मेदारी के लिए किन शब्दों में आभार जताऊं… नहीं है कोई ऐसा शब्द कोश मेरे पास।

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उतरूंगा विश्वास पर खरा
भावनाओं के ज्वार से खुद को उबारते हुए बिरला बोले, मैं जनता जनार्दन के विश्वास पर इंच-इंच खरा उतरने में अपनी पूरी ताकत झोंक दूंगा… उनकी तकलीफ मेरी तकलीफ है… उनकी जरूरतें मेरी जरूरतें हैं… उनका दुख मेरा दुख है… जैसे भी जो भी बन पड़ेगा करूंगा… ताकि कोटा के नाम, विश्वास और प्रेम को हिंदुस्तान के आसमान में जगमगाने में कोई कसर न रह जाए… समय कितना भी व्यस्तताओं से भरा होगा, लेकिन एक-एक लम्हा चुराकर कोटा की सेवा में लगा दूंगा… जहां से भी जिससे भी और जैसे भी कोटा के विकास की राहें खुलती दिखेंगी… उन्हें शहर तक लेकर आऊंगा।

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देर रात तक जागता रहा शहर
आम तौर पर ग्यारह बजे के बाद शहर की सड़कें सूनी होने लगती हैं, लेकिन अपने लाडले नेता के स्वागत के लिए देर रात एक बजे बाद तक लोग सड़कों पर इंतजार करते रहे। टीलेश्वर महादेव मंदिर चौराहे पर रात को एक बजे भी सांसद का स्वागत करने के लिए सौ से अधिक लोग अलग-अलग स्थानों पर मौजूद थे। यही हाल शहर की हर उस सड़क का था, जहां से बिरला का काफिला निकला।