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कुशीनगर हादसा: दिलों पर बोझ बन गए मासूम बच्चों के जनाजे
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कुशीनगर हादसा: दिलों पर बोझ बन गए मासूम बच्चों के जनाजे

कुशीनगर हादसे में मारे गए एक ही परिवार के दो बच्चों का शुक्रवार को हुआ अंतिम संस्कार।
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कुशीनगर. दरवाजे पर लोगों की भीड़ थी, कफन-दफन का इंतजाम किया जा रहा था। सफेद कफन में लिपटे दो मासूम मय्यत की एक ही चारपाई में रखे गए थे। जुमे की नमाज खत्म हुई तो वहां भीड़ और बढ़ी। लोग जनाजा उठाने लगे तो अचानक दर्द के सन्नाटे को चीरते हुए एक चीखती हुई आवाज आयी। ये आवाज मां शकीला की थी। इस एक चीख ने जैसे पूरे माहौल को दर्द से भर दिया। दो औरतें उन्हें पकड़कर दरवाजे तक लायीं। वह रोती रहीं और जनाजा आगे बढ़ता रहा। पडरौना के मडुरही गांव निवासी हैदर के घर के बाहर का ये मंजर हर किसी को रुला गया।


हैदर के दो बेटे गुरुवार को सिवान से गोरखपुर जा रही सवारी गाड़ी ट्रेन से स्कूल वैन की टक्कर में मारे गए। दोनों उसी डिवाइन स्कूल के छात्र थे जिसकी वैन का एक्सिडेंट हुआ। चूंकि हैदर सऊदी अरब में रहकर काम करते थे। वह अपने बच्चों को आखिरी बार देख लें इसके लिये मय्यत रोकी गयी थी। हैदर सऊदी अरब से घर पहुंचे तो शुक्रवार के दिन जुमे की नमाज के बाद अंतिम संस्कार रखा गया।


जुमे की नमाज पढ़कर भीड़ सीधे हैदर के घर पहुंच गयी। वहां गांव की औरतों का मजमा पहले से मौजूद था। आखिरी बार बच्चों के चेहरे घर वालों को दिखाए गए। इसके बाद नमाजे जनाजा अदा करायी गयी। पूरा गांव ने दो मासूमों के जनाजे को कंधा दिया।
by AK Mall