
नागौर. नगरपरिषद में शहर के विकास से लेकर तमाम सारे कार्य समितियों के माध्यम से किए जाने के प्रावधान होने के बाद भी समितियां अप्रभावी बनी हुई है। बताते हैं कि समिति गठित हेाने के के करीब ढाई साल बाद भी समितियों की एक भी बैठक तक नहीं हुई। जबकि सडक़ों का निर्माण कराना हो या फिर शहर के विकास की रूपरेखा, यह सारे कार्य समितियों के माध्यम से किए जाना रहता है, लेकिन इस मामले में नागौर नगरपरिषद अपवाद रही है। विशेष बात यह है कि पूरे तीन साल बाद भी यह समितियां भी केवल कागजों में ही नहीं हुई है। इनकी बैठकों आदि के बारे में खुद समितियों में शामिल पार्षदों तक को नहीं है कि इसकी कभी बैठक हुई या नहीं…! इससे स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
नगरपरिषद में बोर्ड का गठन वर्ष 2021 में हुआ था। इसके 90 दिन में समितियों का गठन किया जाना था, लेकिन यह अवधि बीत जाने के बाद भी समितियां गठित नहीं की जा सकी तो फिर वर्ष 2022 में राज्य सरकार की ओर से समितियों का गठन किया गया था। समितियों के गठन होने के पश्चात स्थानीय निकाय के विकास एवं शहर की स्वच्छता से जुड़े टेण्डर आदि की प्रक्रिया भी इनके मार्फत चर्चा के पश्चात ही कराई जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा होने की जगह नगरपरिषद में मनमर्जी से काम चलता रहा।
इन समितियों का किया गया था गठन
कार्यपालिका समिति का अध्यक्ष मीतू बोथरा, स्वास्थ्य और स्वच्छता समिति दो बनी है। इसमें ए में अध्यक्ष सदाकत अली एवं बी में पिंकी को अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह से भवन अनुज्ञा और संकर्म समिति अध्यक्ष पायल गहलोत, कच्ची बस्ती सुधार समिति अध्यक्ष भजनसिंह, नियम एवं उपविधि समिति अध्यक्ष यतिराज धनावत, अपराध प्रशमन और समझौता समिति अध्यक्ष गोविंद कड़वा, विद्युत व्यवस्था समिति ए में अध्यक्ष कैकई एवं बी में ललित किशोर को अध्यक्ष बनाया गया है। महिला और बाल विकास गरीबी उन्मूलन सार्वजनिक वितरण प्रणाली और जरूररतंद व्यक्तियों को भोजन व्यवस्था समिति पदमचंद, अतिक्रमण रोकथाम समिति अध्यक्ष भागचंद, मेला उत्सव समिति अध्यक्ष मकबूल अहमद, वेंडर्स एवं टॉवर शुल्क समिति अध्यक्ष विशाल शर्मा, सौन्दर्यीकरण समिति अध्यक्ष पांचीदेवी, वित्त समिति अध्यक्ष नवरतन बोथरा, खांचा भूमि एवं नियमन समिति अध्यक्ष असगर, स्टेट ग्रांट समिति अध्यक्ष यतीराज, उद्यान समिति अध्यक्ष रघुवीर आदि शामिल है।
इन समितियों की बैठकें होनी जरूरी रहती है
गठित समितियों में स्वास्थ्य और स्वच्छता समिति, कच्ची बस्ती सुधार, समिति नियम एवं उपविधि समिति, अपराध प्रशमन और समझौता समिति, खांचा भूमि एवं नियमन समिति, स्टेट ग्रांट समिति एवं विद्युत समिति आदि सरीखी समितियां बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। बताते हैं कि कम से कम इनकी बैठकें जरूर की जानी रहती है। ताकि शहर के विकास कार्य को गति मिल सके , लेकिन ऐसा हुआ नहीं। समितियों से जुड़े पार्षदों से बातचीत की गई तो उनका भी कहना था कि बैठक हुई या नहीं, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। समितियों में शामिल पार्षदों का कहना है कि उनको कभी बुलाया ही नहीं गया।
इनका कहना है…
स्थानीय निकायों में सारे कार्य समितियों के माध्यम से किए जाने के प्रावधान हैं, लेकिन समितियों के गठित होने के बाद आज तक कोई बैठक ही नहीं हुई।
धर्मेन्द्र पंवार, सदस्य, सौन्दर्यीकरण समिति, नगरपरिषद नागौर
कच्ची बस्ती सुधार समिति के मार्फत शहर के जरूरतमंदों को राहत मिलती, मगर यह विडंबना है कि सरकार की ओर से समिति गठित होने के बाद भी किसी भी समिति की आज तक बैठक ही नहीं की गई।
मुजाहिद इस्लाम, सदस्य, कच्ची बस्ती सुधार समिति, नगरपरिषद नागौर