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खतरनाक कचरे के साथ पहुंच रहे गंदे पानी से जहर का तालाब बना गिनाणी तालाब…VIDEO

नागौर. गत आठ से नौ सालों से लगातार नाले का गंदा पानी छोड़े जाने के चलते गिनाणी तालाब अब जहर का तालाब बन गया है। इसका पानी इतना ज्यादा जहरीला हो चुका है कि इसको पशुओं तक को नहीं पिलाया जा सकता है। इस वजह से इस तालाब की जैविक प्रकृति ही पूरी तरह से […]

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नागौर. गत आठ से नौ सालों से लगातार नाले का गंदा पानी छोड़े जाने के चलते गिनाणी तालाब अब जहर का तालाब बन गया है। इसका पानी इतना ज्यादा जहरीला हो चुका है कि इसको पशुओं तक को नहीं पिलाया जा सकता है। इस वजह से इस तालाब की जैविक प्रकृति ही पूरी तरह से बदल चुकी है। तालाब में जा रहा यह पानी इसके भूजल के साथ ही आसपास के करीब एक किलोमीटर के एरिया क्षेत्र के भूजल को भी प्रभावित कर रहा है। गंदे पानी की आवक इसमें बंद नहीं होने के कारण जहां गिनाणी तालाब की सांसें अब उखडऩे लगी है, वहीं पर्यावरण जागरुकता का शोर मचाने वाले जिम्मेदारों को दम तोड़ता पर्यावरण नजर नहीं आ रहा है।
खरतनाक तत्वों के साथ हो रही गंदे पानी की आवक
शहर के परंपरागत जलस्रोतों के रूप में गिनाणी तालाब में नाले एवं नालियों का गंदा पानी खतरनाक तत्वों के साथ पहुंच रहा है। इसकी वजह से इसकी जैविक प्रकृति बिगडऩे के कारण पानी का रंग भी बदल चुका है। इतना ही नहीं, बल्कि आसपास का पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ ही जलीय एवं भूजलीय प्रदूषण का संकट बढऩे लगा है। पड़ताल में सामने आया कि लोहारपुरा क्षेत्र से गुजरते हुए बड़े नाले का गंदा पानी सीधा गिनाणी में गिर रहा है। स्थानीय बाशिंदों की माने तो पहले ऐसा नहीं था, बल्कि यह सिलसिला केवल आठ से नौ सालों से ही शुरू हुआ है। इसके पहले इस तालाब की स्थिति काफी बेहतर थी।
खत्म हो रहा गिनाणी तालाब
गंदगी के चलते यह परंपरागत जलस्रोत भी अब विषैले मच्छरों की फैक्ट्री बन गया है। बताते हैं कि इसके आसपास करीब साढ़े तीन हजार से ज्यादा घर हैं। इन घरों का गंदा पानी भी छद्म रूप से बनी नालियों के रास्ते सीधा गिनाणी तालाब में गिर रहा है। हजारों घरों के पानी के साथ ही नाले के आ रहे गंदे पानी के कारण अब यह पूरा तालाब लगभग खत्म हो चुका है। यह पूरी तरह से एक नाले के तौर पर बदल चुका है। स्थिति इतनी ज्यादा खराब हो गई है कि तालाब के किनारे दुर्गन्ध के चलते खड़ा तक होना मुश्किल हो गया है।
क्या होता है प्रदूषण
जल में अन्य पदार्थों का मिलना या जल में उपस्थिति पदार्थों की मात्रा का बढऩा प्रदूषण कहलाता है। पॉल्यूशन शब्द लैटिन भाषा के शब्द पोल्यूशनम से लिया गया है। इसका अर्थ गन्दा करना है। जल मृदा व हवा जीवन के लिये अनिवार्य हैं। जल मृदा व हवा में अतिरिक्त पदार्थों के एकत्रित होने से इनके गुणों में परिवर्तन होता है। इसे प्रदूषण या पॉल्यूशन कहते हैं, जिन पदार्थों की उपस्थिति से मृदा, जल, वायु के भौतिक, रासायनिक गुणों में परिवर्तन होता है, उन्हें पॉल्यूटेंट कहते हैं। पॉल्यूटेंट हानिकारक होते हैं।
पानी के लिए गंदगी व कचरा होता है खतरनाक
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण का मुख्य स्रोत गारबेज यानि की जो पानी में कूड़ा-करकट, गन्दगी मिला दी जाती है। इस गंदगी में भारी धातुएँ जैसे निकिल, क्रोमियम, कोबाल्ट, कैडमियम, लेड भी पाये जाते हैं। यह काफी हानिकारक हैं। इन धातुओं के कारण फाइटो टॉक्सीसिटी लेवल अधिक हो जाता है। इससे यह पेड़ों और मनुष्यों में रोग उत्पन्न करते हैं। गारबेज के सडऩे पर विखण्डन होने पर गैसें निकलती हैं। वातावरण में खतरनाक प्रभाव छोडऩे के साथ ही जो दुर्गन्ध उत्पन्न कर, पर्यावरण को भी प्रदूषित करती हैं्र। गारबेज के जल में मिलने से जल पूरी तरह से प्रदूषित हो जाता है।
गंदे पानी की आवक को रोकना होगा
गिनाणी तालाब को फिर से इसके मूल स्वरूप में लाने के लिए काफी प्रयास किए गए हैं। पहला काम इसमें गंदे पानी की आवक को रोकना होगा। यह तालाब काफी बड़े एरिया में है। ऐसे में इसका पानी पूरी तरह से साफ हो गया तो फिर निश्चित रूप से आसपास का भूजल भी अच्छी स्थिति में हो जाएगा। अब ऐसे तो पर्यावरण के नाम पर कई लोग शोर मचाने आ जाते हंै, लेकिन खत्म हो रहे गिनाणी तालाब को बचाने के लिए गंदे पानी की आवक इसमें रोकने के लिए किसी की ओर से कुछ भी नहीं किया जा रहा है।
हाजी शमशेर खान, सदर सूफी हमीदुद्दीन चिश्ती नागौरी दरगाह वक्फ कमेटी नागौर
अनुपयोगी और खतरनाक हो जाता है
कृषि महाविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्री बताते हैं कि के स्वच्छ जल को पशु तथा पेडो़ में देने के लिए तथा कई जगह पीने के लिए काम में लिया जाता है। गंदे नालों के पानी की उसमें मिश्रित होने से वह पानी काफ़ी हद तक अनुपयोगी हो जाता है। कई बार कई बारी तार तथा वेस्ट मैटेरियल भी उसमें शामिल होते हैं जो जानवरों तथा मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
डॉ. विकास पावडिय़ा, कृषि अर्थशास्त्री, कृषि महाविद्यालय नागौर
कलक्टर को लिखकर देने के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति
नगरपरिषद के बोर्ड की हुई बैठकों में भी गिनाणी तालाब में गंदे पानी की आवक को रोकने का मुद्दा उठा चुका हूं। इसके साथ ही जिला कलक्टर को भी लिखित में कई बार इसे दिया जा चुका है। अफसोसजनक स्थिति यह है कि प्रशासन भी इस तालाब को बचाने के लिए कुछ नहीं कर रहा।
मकबूल अहमद, क्षेत्रीय पार्षद
प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ेगा, तभी बचेगा पर्यावरण
घरों से निकलने वाले मलिन जल एवं वाहित मल को एकत्रित कर संशोधन संयंत्रों में पूर्ण उपचार करने के साथ ही कुओं, तालाबों के चारों ओर दीवार बनाकर विभिन्न प्रकार की गन्दगी को रोकना होगा। जलाशयों के आस-पास गन्दगी करने, गंदे पानी जाने के स्रोत पर रोक लगानी होगी। अपशिष्टों का बिना उपचार किये जलस्रोतों में विसर्जित करने पर रोक लगानी होगी।इसलिए वर्षा के जल को तथा तालाब ज़ल को एक केचमेँट एरिया के अंतर्गत संरक्षित किया जाना चाहिए तथा गंदे पानी को ट्रीटमेंट के बाद में ही ऐसे जलस्रोतों की तरफ़ छोड़ा जाना चाहिए