नागौर. बहुचर्चित सरकारी प्रतिबंधित भूमि पर नियमों के विरुद्ध पट्टे जारी करने के मामले में जिला कलक्टर की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। प्रशासनिक अधिकारियों की यह जांच रिपोर्ट अब कोतवाली थाने तक पहुंच चुकी है। पूरे प्रकरण की जांच कोतवाली पुलिस की ओर से जांच की जा रही है है। इस प्रकरण की जड़ें वर्ष 2023 से जुड़ी हैं। उस समय तत्कालीन नायब तहसीलदार परसाराम ने नगर परिषद के कुछ कार्मिकों के खिलाफ कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नगर परिषद की ओर से सरकारी प्रतिबंधित भूमि पर नियमों और प्रावधानों की अनदेखी करते हुए पट्टे जारी किए गए, जिससे राजस्थान सरकार की राजकीय संपत्ति को सीधा नुकसान पहुंचा।
उस दौरान गठित जांच समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से सामने आया था कि जिन 16 पट्टों को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, वह भूमि नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती थी। जांच में यह भी बताया गया था कि संबंधित भूमि शुद्ध रूप से राजस्थान सरकार के खाते में दर्ज थी। इसके बावजूद नगर परिषद की ओर से पट्टे जारी किए गए, जिन्हें नियमों और वैधानिक प्रावधानों के प्रतिकूल माना गया।
इस पूरे मामले में शुरुआत से ही पट्टों की संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रही। तहसीलदार की ओर से 8 मार्च को जिला कलक्टर को 27 पट्टों की एक सूची सौंपी गई थी। हालांकि बाद में जब प्राथमिकी दर्ज की गई, तो उसमें केवल 16 पट्टों का ही उल्लेख किया गया। शेष 11 पट्टों को लेकर तब से लगातार सवाल उठते रहे हैं और यह मुद्दा प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना रहा। राजस्व विभाग का कहना है कि जिन 11 पट्टों को एफआईआर में शामिल नहीं किया गया, वे फिलहाल विचाराधीन हैं और उनकी जांच की प्रक्रिया जारी है। विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और संबंधित फाइलों का परीक्षण किया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इन पट्टों के मामले में भी नियमों की अनदेखी हुई या नहीं। अब प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद मामला पुलिस जांच के दायरे में आ चुका है। कोतवाली पुलिस जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह तय करेगी कि किन अधिकारियों और कार्मिकों की भूमिका संदिग्ध रही और किस स्तर पर नियमों की अनदेखी या लापरवाही हुई। पुलिस जांच के दौरान दस्तावेजी साक्ष्य, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इस संबंध में कोतवाली थानाधिकारी वेदपाल शिवरान का कहना है कि जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। रिपोर्ट का आंकलन किया जा रहा है और जब तक इसका पूरा अध्ययन नहीं हो जाता, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि प्रकरण से जुड़े कुछ और दस्तावेजों की आवश्यकता है, जिसके लिए संबंधित विभागों से पत्राचार किया जा रहा है। दस्तावेज मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकेगी। कुल मिलाकर, सरकारी प्रतिबंधित भूमि पर अवैध पट्टों से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और संभावित मिलीभगत की ओर संकेत करता है। अब पुलिस जांच के निष्कर्षों पर यह निर्भर करेगा कि इस प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों और कार्मिकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है और मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।