नागौर. गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गौपालन विभाग की ओर से कवायद शुरू कर दी गई है। इसमें छह सौ से ज्यादा गौवंश वाली गौशालाओं को गौ काष्ठ मशीनें दी जा रही है। इस मशीन से गौबर एवं अन्य कृषि उत्पादों से काष्ठ का उत्पादन कर उसका बाजारों में बेचान किया जाएगा। ताकि गौशालाओं को अर्थिक आय हो सके। इसके लिए विभाग की ओर से जिले की फिलहाल चार गौशालाओं को चयन कर मशीनें उनको दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि अभी कुछ तक इसकी उत्पादन एवं विक्रय से जुड़ी गतिविधियों का ध्यान रखा जाएगा। सबकुछ योजनानुसार चला तो इसका विस्तार कर अन्य गौशालाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
मिली मशीनों से बनेगी लकडिय़ां
अनुदान के साथ ही अब गौशालाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाए जाने की दिशा में गौपालन विभाग ने गौशालाओं के लिए गौ काष्ठ मशीनें भिजवाई है। यह मशीनें जिले जिले के ताऊसर, नारवा, कुड़छी एवं रोल की गौशालाओं को दी गई है। पशुपालन विभाग के माध्यम से इन मशीनों को चयनित गौशालाओं को भिजवाए जाने के साथ ही इनके संचालन से जुड़ी जानकारियां भी गौ संचालकों को दी गई है। ताकि संचालन से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित न हो।
मशीनों से इसका होगा उत्पादन
गोबर से लकड़ी, गोबर से ईट, कृषि उत्पाद में पराली, गेहूं का भूसा, सरसों की तुड़ी, खेत में वेस्ट मैटीरियल से लकड़ी, गोल चक्कर लकड़ी आदि बनाई जाएगी।
यहां पर होगा इन लकडिय़ों का उपोग
विभागीय अधिकारियों के अनुसार गौ काष्ठ उत्पाद का उपयोग मोक्षधाम, फैक्ट्री, बॉयलर, रेस्टोरेंट, होटल, ढाबों एवं मंदिरों एवं अनुष्टान आदि के साथ ही अन्य धार्मिक कार्यों में किया जाता है। गौशालाओं में तैयार उत्पादों की बिक्री इन क्षेत्रों में सहजता से की जा सकती है।
मशीनों पर 80 प्रतिशत सब्सिडी
अधिकारियों के अनुसार सरकार की ओर से इन मशीनों पर 80 प्रतिशत की सब्सिडी देय है। इसकी कुल कीमत 70350 रुपए बताई जाती है। इसमें 20 प्रतिशत राशि गौशालाओं को खुद ही वहन करनी होगी। शेष अनुदान राशि के तौर पर सरकार वहन करेगी।
यह होनी चाहिए पात्रता
पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इसके लिए कम से कम छह सौ गौवंश होने चाहिए। स्वयं के स्वामित्व की पांच बीघा जमीन होने के साथ ही थ्रीफेज बिजली कनेक्शन होना चाहिए। इसके साथ ही पानी का बेहतर स्रोत भी होना चाहिए।
432 में से 4 का चयन हो पाया
पशु पालन विभाग के अनुसार जिले में कुल 432 गौशालाएं हैं। इसमें सभी गौशालाओं का योजना के मापदंडों के अनुसार सर्वे किया गया। सर्वे में केवल चार गौशालाएं ही पात्र मिली। हालांकि आवेदनों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन चार को ही पात्र माना गया है। इसके पश्चात यह मशीनें पात्र गौशालाओं को पहुंचा दी गई।
इनका कहना है…
गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह नवाचार किया गया है। इसके तहत योजनानुसार चार चयनित गौशालाओं को गो काष्ठ मशीनें सब्सिडी पर दी गई हैं। ताकि गौशालाएं भी आत्मनिर्भर हो सकें।
डॉ. महेश कुमार मीणा, संयुक्त निदेशक पशुपालन नागौर