
दरियाव महाराज के 266 मोक्ष दिवस पर रामस्नेही संत व श्रद्धालु उमड़े
नागौर जिले के रेण कस्बे के लाखासागर तट स्थित रामधाम देवल में मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ रामस्नेही संप्रदाय के संस्थापक आदी आचार्य दरियाव महाराज के 266 वें मोक्ष दिवस पर पीठाधीश्वर सज्जनराम महाराज व उत्तराधिकारी बस्तीराम शास्त्री के सानिध्य में पूजा-अर्चना, सत्संग प्रवचनों का आयोजन हुआ। वही श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ दरियाव महाराज की तपस्याकृत ईंट लाखासागर सरोवर में तैराई गई।
रामधाम देवल संत ओमदास महाराज ने बताया कि मोक्ष दिवस पर सुबह 7 बजे दरियाव महाराज के मुख्य मंदिर में पीठाचार्य सज्जनराम महाराज, रामधाम देवल के उत्तराधिकारी संत बस्तीराम शास्त्री ने ब्रह्मलीन आदी आचार्य की चरण पादुकाओं का पूजन कर आरती की। इसके पश्चात दोपहर 1 से 2 बजे तक रामस्नेही संत व श्रद्धालुओं ने वाणीजी का संगीतमय वाचन किया।
धर्मसभा में बोले पीठाधीश्वर- ‘रसना को राम नाम की रट में लगाएं…
वही मोक्ष दिवस पर रामधाम देवल के मुख्य सत्संग भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए पीठाधीश्वर सज्जनराम महाराज ने कहा कि हमारे मन के भाव ‘सर्वे भवंतु सुखिन:’ हो। दु:ख के साथ जुडऩे से दु:ख बढ़ते है और सुख के साथ जुडऩे से सुख की वृद्धि होती है। पापों का हरण करने वाले हरि का स्मरण करते रहना चाहिए। रसना (जीभ) ही सुख और दु:ख का कारण बनती है। रसना को वश में करके उसे रामनाम की रट में व्यस्त रखना चाहिए। जिससे मनुष्य विषय वासनाओं की तरफ न जाकर राम नाम रट में व्यस्त रहे। वही उत्तराधिकारी बस्तीराम शास्त्री ने कहा कि एक जीवन में की गई साधना का फल जन्म जन्मांतर मिलता रहता है। व्यक्ति को अंत:करण के भाव को सचेत कर राम नाम के अनुभव का व्यापक बनाने की कोशिश करनी चाहिए। हमे ध्यान रखना चाहिए मृत्यु अपरिहार्य है। राम नाम की साधना से मृत्यु को जीत कर अमरता प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
फिर पवित्र सरोवर में तैरीतपस्याकृत ईंट
सांय सवा 4 बजे ज्यो ही चमकीले वस्त्र में लिपटी दरियाव महाराज की तपस्याकृतईट कड़ी चौकसी के बीच लेकर संत ओमदास महाराज सरोवर की ओर निकलने त्यो ही लाखासागर सरोवर तट पर खड़े श्रद्धालु दरियाव महाराज व ब्रह्मलीन हरिनारायण महाराज के गगनवेदी जयकार लगाने लगे। देखते ही देखते दरियाव महाराज की पवित्र ईंट पानी में कागज के नांव की भांति तैरने लगी। जिसे सरोवर तट पर हजारों की तादाद में दूर खड़े श्रद्धालु एक टक निहारते रहे। करीबन 7 से 10 मिनट तक दरियाव महाराज की ईंट सरोवर में तैरती रही। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने पवित्र जल का आचमन किया।