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Nagaur patrika…अज्ञान, मोह, शोक और भय से मुक्त मृत्यु होनी चाहिए…VIDEO
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Nagaur patrika…अज्ञान, मोह, शोक और भय से मुक्त मृत्यु होनी चाहिए…VIDEO

नागौर. जयगच्छीय 11वें पट्टधर आचार्य शुभचंद्र महाराज का 7वां स्मृति दिवस रविवार को श्रद्धापूर्वक मनाया गया। श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ की ओर से आयोजित सामूहिक दया व्रत में उपासक-उपासिकाओं ने 11 सामायिक साधना करते हुए पूरा दिन धर्ममय वातावरण में बिताया। इस मौके पर सुशील धरम आराधना भवन में हुए प्रवचन में जैन […]

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नागौर. जयगच्छीय 11वें पट्टधर आचार्य शुभचंद्र महाराज का 7वां स्मृति दिवस रविवार को श्रद्धापूर्वक मनाया गया। श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ की ओर से आयोजित सामूहिक दया व्रत में उपासक-उपासिकाओं ने 11 सामायिक साधना करते हुए पूरा दिन धर्ममय वातावरण में बिताया। इस मौके पर सुशील धरम आराधना भवन में हुए प्रवचन में जैन समणी सुयशनिधि ने कहा कि पर्युषण पर्व कृष्ण पक्ष में प्रारंभ होकर शुक्ल पक्ष में समाप्त होता है। यह अंधकार से प्रकाश की ओर जाने की प्रेरणा देता है। जीवन और मृत्यु दोनों अनिवार्य सत्य हैं। जैन दर्शन हमें सिखाता है कि मृत्यु कैसी होगी, यह सबसे महत्वपूर्ण है। आचार्य शुभचंद्र महाराज ने जीवन के अंतिम शिखर पर सल्लेखना संथारा ग्रहण कर आत्मा को शुद्धता की ओर ले गएा। उन्होंने कहा कि कहने का अर्थ यह है ऐसी मृत्यु जिसमें आत्मा पूर्ण सजगता, शांति और सम्यक दृष्टि के साथ शरीर का परित्याग करे। यह अज्ञान, मोह, शोक और भय से मुक्त होती है। मनुष्य जीवन का सच्चा आनंद न धन-संपत्ति में है, न वैभव या पद में, बल्कि तीन मूल सूत्रों—पवित्रता, मैत्रीभाव और विनम्रता—के पालन में है। जीवन पवित्र हो तो मन निर्मल बनता और आत्मा शांति अनुभव करती है। द्वेष और अहंकार जीवन की खुशियाँ छीन लेते हैं, जबकि मैत्री और विनम्रता आत्मा को हल्का और आनंदित बनाते हैं। जैन समणी सुगमनिधि ने अंतगड़ सूत्र का मूल वाचन करते हुए उसका अर्थ विवेचन भी किया।
भजनों की प्रस्तुति
कार्यक्रम में भजनों की प्रस्तुति की गई। प्रवचन की प्रभावना का लाभ अकल्यादेवी और हस्तीमल पींचा परिवार ने लिया। संघ मंत्री हरकचंद ललवानी ने बताया कि प्रवचन में पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर देने पर विनीता पींचा व रीटा ललवानी को सम्मानित किया गया। संचालन संजय पींचा ने किया। इस दौरान दिलीप चोपड़ा, कमलचंद ललवानी, भीखमचंद ललवानी, पूनमचंद बैद, नितेश ललवानी, परम ललवानी, सोहन नाहर, गणेश, भाग्यश्री ललवानी, वंशिता जैन, सरोज बंजारा, चैनसुख बोहरा, कन्हैयालाल चोपड़ा, किशोरचंद ललवानी, किस्तूरचंद अबानी, विमलचंद नाहटा आदि मौजूद थ्ेा।