
नागौर. जरा सी बारिश होते ही शहर में जलप्लावन का दृश्य बन जाता है। कई इलाकों में बाढ़ सरीखे हालात होने के कारण नावों के चलने की स्थिति बन जाती है। हर साल मानसूनी बारिश के दौरान शहर में जल निकासी की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नगरपरिषद की ओर से खासी तैयारी की जाती है। तैयारी की स्थिति का आलम यह है कि पंद्रह मिनट से आधा घंटा की तेज बारिश भी यह शहर नहीं झेल पाता है। तेज बारिश हुई तो व्यवसायिक क्षेत्रों के साथ ही आवासीय क्षेत्रों में कई जगहों पर स्थिति अनियंत्रित हो जाती है, और लोगों को घंटों केवल पानी निकलने का इंतजार करना पड़ता है। इसके पीछे वजह बताई जाती है आवासीय क्षेत्रों में न केवल नालियों का पूरी तरह से बंद कर दिया जाना, बल्कि नालों को बारिश के अनुरूप विकसित नहीं करना।
हल्की बारिश में इन क्षेत्रों में हो जाता है जलप्लावन
बरसात के दौरान कृषि मंडी एरिया, मंडी चौराहा, बीकानेर रेलवे फाटक पार कृषि मंडी के पीछे स्थित कॉलोनियां, श्रीराम कॉलोनी, महादेव कॉलोनी, ताऊसर रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड, शिवबाड़ी क्षेत्र, दिल्ली दरवाजा अंदर व बाहर के बाजार, गांधी चौक, काठडिय़ा का चौक, बाठडिय़ों का चौक, लोहिया का चौक, मिश्रावाड़ी, तेलीवाड़ा, नया तेलीवाड़ा, बाजरवाड़ा, माही दरवाजा क्षेत्रों में बरसात का पानी का मुख्य मार्गों पर एकत्रित हो जाता है।
जल जमाव का यह है कारण
कृषि मंडी के निकट स्थित नाला का मुहाना काफी छोटा और संकरा है। बरसात में आने वाला पानी तेज बहाव के साथ आता है। पानी इतनी अधिक मात्रा में होता है कि वह पूरी तरह से नाले में नहीं जा पाता है। इसके साथ ही नाले का जाम होना। शिवबाड़ी महादेव मंदिर के पास स्थित नाला भी काफी संकरा है। तेज बहाव के साथ भारी मात्रा में आने वाले पानी के अनुरूप नाला नहीं बनाया गया। इसकी वजह से इस पूरे क्षेत्र में मुख्य मार्ग पर घुटनों के ऊपर तक पानी भरा रहता है। गांधी चौक क्षेत्र में भी जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां पर भी पानी भर जाता है। दिल्ली दरवाजा क्षेत्र के अंदर एवं बाहर के बाजार क्षेत्र में भी बरसात का पानी भर जाता है। यहां पर जमा हुआ पानी निकलने में घंटो लग जाते हैं। इसके पीछे कारण बताते हैं कि पहले पानी गाजी खाड़ा क्षेत्र की ओर चला जाता था, लेकिन बाद में निर्माण के दौरान सडक़ ऊंची होने की वजह से अब जा नहीं पाता है। माही दरवाजा क्षेत्र की भी यही स्थिति है। नाला संकरा और छोटा होने के कारण पानी के बहाव के अनुरूप इसमें नहीं आ पाता है। यही पानी सडक़ पर भर जाता है। विजयबल्लभ चौराहा क्षेत्र के आसपास भी यही स्थिति है। कारण भी यही है कि पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होना।
यहां से नाली ही हटा दी
शहर के ताऊसर रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में ज्यादातर इलाकों में जल निकासी के लिए बनी नाली ही गायब हो चुकी है। खासकर सेक्टर एक के क्षेत्र में 99 प्रतिशत जगहों पर से नाली गायब हो चुकी है। अब नाली नहीं होने के कारण हल्की बरसात में भी यह पूरा क्षेत्र जलमग्न हो जाता है। स्थिति इतनी खराब है कि पंद्रह मिनट की तेज बरसात होने पर पानी सीधा घरों के अंदर घुसता है। लोगों केा अपने सामान सहित दूसरी मंजिल पर शरण लेनी पड़ती है।
न ठेका किया, न ही तैयारियां की, अब बिगड़ी स्थिति
शहर के नालों की सफाई का ठेका हर वर्ष मानसून के पहले देकर सफाई कराई जाती है, लेकिन इस वर्ष नगरपरिषद अब तक इस बार नालों की सफाई भी नहीं करा पाई। इसके अलावा मानसूनी बारिश के दौरान शहर की जल निकासी व्यवस्था समुचित रूप से कराए जाने के लिए परिषद में अधिकारियों ने इस वर्ष कोई बैठक तक नहीं की। हर साल बैठक के बाद एक टीम पूरे शहर का दौरा कर रिपोर्ट सौंपती थी। इस वर्ष परिषद की ओर से कोई कवायद नहीं की गई।
इनका कहना है ….
मानसूनी बारिश के लिए जल निकासी की व्यवस्था के लिए इस वर्ष नगरपरिषद की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई। कई नाले काफी पुराने होने के साथ छोटे भी हैं। इनको भी विकसित नहीं किया गया। अब ऐसे में तेज बरसात हुई तो फिर शहर में कई इलाकों में बाढ़ सरीखे हालात बन जाएंगे।
सदाकत अली सुलेमानी, उपसभापति, नगरपरिषद नागौर
किसी भी इलाके में पानी भरने की स्थिति में वहां से जल निकासी के लिए पंपों की व्यवस्था की गई है। इसके लिए परिषद की ओर से पूरी तैयारियां की गई है। अलग से टीम भी बनाई गई है। यह टीम बारिश के दौरान शहर की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ लोगों के संपर्क में भी रहती है।
रमेश रिणवा, कार्यवाहक आयुक्त नगर परिषद नागौर