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Nagaur patrika…जयमल महाराज का चरित्र की दृढ़ता सभी के लिए प्रेरणास्रोत…VIDEO

नागौर. श्री जयमल जैन पौषधशाला, नागौर में 318वीं जयमल जयंती के उपलक्ष्य में त्रिदिवसीय महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर हुए प्रवचन में जैन समणी सुयशनिधि ने कहा कि आचार्य जयमल महाराज का जीवन आत्मबल, तप और चारित्र का अनुपम उदाहरण है। उनके अंदर बचपन से ही उनमें वैराग्य की भावना थी, और उनका […]

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नागौर. श्री जयमल जैन पौषधशाला, नागौर में 318वीं जयमल जयंती के उपलक्ष्य में त्रिदिवसीय महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर हुए प्रवचन में जैन समणी सुयशनिधि ने कहा कि आचार्य जयमल महाराज का जीवन आत्मबल, तप और चारित्र का अनुपम उदाहरण है। उनके अंदर बचपन से ही उनमें वैराग्य की भावना थी, और उनका जीवन आज की पीढ़ी को संयम व अनुशासन का संदेश देता है। जयमल महाराज का अखण्ड ब्रह्मचर्य व चरित्र की दृढ़ता सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने विवाह प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए डॉ े कहा कि सांसारिक जीवन में भी वैराग्य की आभा उनके भीतर प्रकट हो चुकी थी। नैतिकता प्रामाणिकता के साथ साथ उनके पिता के प्रति आज्ञाकारिता ने उन्हें पुत्र धर्म का अद्वितीय आदर्श बनाया। प्रवचन के बाद हुए प्रश्नोत्तरी सत्र में विनिता पींचा और हंसराज भूरट को रजत मेडल से सम्मानित किया गया। जबकि बोनस प्रश्नों के सही उत्तर देने पर नेहा चौरडिय़ा और ललिता छल्लाणी को सम्मान प्राप्त हुआ। प्रवचन प्रभावना का लाभ आणदी देवी जसवन्तराज सुराणा परिवार ने लिया। भजन प्रस्तुति जगदीश माली ने दी। पीयूष बोथरा ने समणी वृंद से 8 प्रत्याख्यान लेकर तेले तप का संकल्प लिया। इनको भी सम्मानित किया गया। इस दौरान हरकचंद ललवाणी, महावीरचंद भूरट, हंसराज भूरट, ललित सुराणा, प्रकाशचंद बोहरा, नरपतचंद ललवाणी आदि मौजूद थे।