खजवाना में श्रीमद् भागवत कथा
नागौर जिले के खजवाना. कस्बे के ठाकुरजी मन्दिर में श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथा करते हुए संत हरिशरण महाराज ने श्रीकृष्ण और रुकमणी के विवाह के प्रसंग का श्रद्धालुओं को रसपान कराया।
संत ने कहा कि भगवान की रास लीला इतनी दिव्य है कि स्वयं भोलेनाथ उनके बाल रूप के दर्शन करने के लिए गोकुल पहुंच गए। अक्रूरजी भगवान को लेने आए, जब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा जाने लगे तो समस्त ब्रज की गोपियां उनके रथ के आगे खड़ी हो गई और कहने लगी हे कन्हैया जब आपको हमें छोड़कर ही जाना था तो हम से प्रेम किया ही क्यो ? इस पर भगवान कृष्ण कहते हैं कि प्रेम तो अमूर्त होता है। मैं सदैव आपके हृदय में सजीव रहूंगा।
कथा व्यास ने रास के पांच अध्यायों का वर्णन करते हुए कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाये जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं जो ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा के दौरान वृंदावन में राधे-राधे, कुंज गली में राधे-राधे…..भजन पर श्रद्धालु नाचने लगे।